जनपद से लापता 37 बच्चों को नहीं ढूंढ पा रही पुलिस

Baghpat Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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बागपत। एक बार का रोना हो, तो रोकर सबर आए
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पर ताउम्र ही रोना हो, तो कहां से जिगर लाएं
कुछ ऐसी ही अंतहीन पीड़ा है, उन अभागे मां-बाप की, जिनकी आंखों के तारे उनकी आंखों से दूर हो गए। बच्चा एक बार क्या गुम हुआ, फिर मिला ही नहीं। पुलिस ही नहीं, तंत्र-मंत्र और जादू-टोना करने वालों तक के चक्कर लगाए, लेकिन हर तरफ मायूसी मिली। निठारी कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की गुमशुदगी पर पुलिस को जगाया था, लेकिन लगता है नींद की झपकी फिर से लग गई है। लापता बच्चों की तलाश में ज्यादा तो क्या जरा सी भी गंभीरता पुलिस में नजर नहीं आती है।
पुलिस रिकार्ड में जनपद से 37 बच्चे लापता चल रहे हैं। पुलिसिया लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इनमें से जो एक-दो उनके परिवार ने जैसे-तैसे खोज लिए हैं, उनकी भी जानकारी तक नहीं है पुलिस के पास। इसका सीधा सा मतलब यह है कि लापता बच्चों के परिवार से पुलिस का संवाद तक नहीं हो रहा है।
गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए एसपी ऑफिस में स्पेशल सेल बनाई गई है। पता है क्या हाल है इस सेल का? एक कुर्सी है, एक मेज है, और चार-पांच रजिस्टर। जिस थाने में गुमशुदगी दर्ज होती है, उससे सूचना यहां पहुंच जाती है, और फिर आगे कहीं नहीं जाती।
जिले से 37 बच्चे लापता हैं, लेकिन किसी भी थाने पर तस्वीर पांच-छह से ज्यादा की नहीं। चौराहों पर पोस्टर लगाना तो दूर एसपी ऑफिस पर भी लापता बच्चों के फोटो तक नहीं लगाए गए। शासन का आदेश तो यही था कि गुमशुदगी पर एसपी ही नहीं, डीआईजी और आईजी भी समय समय पर मीटिंग लेकर समीक्षा करें, लेकिन ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा। लापता चल रहे बच्चों के परिजनों को बुलाकर अफसर मीटिंग तक नहीं कर रहे।
केस-1
बागपत पुलिस से उठा भरोसा
22 फरवरी 2013 को शबगा गांव से आठ साल का कार्तिक लापता हुआ था। उसके परिवार ने खूब हंगामा किया, तो पुलिस ने मामला अपहरण-हत्या का बताकर पांच लोग मुल्जिम बना दिए, लेकिन आज तक न तो कार्तिक मिला, न ही उसका शव। उसके पिता विजेंद्र का कहना है कि उनका पुलिस से भरोसा उठ चुका है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
केस-2
गाधी गांव का 14 साल का आशू उर्फ आशीष 10 जुलाई 2012 को लापता हुआ था। उसके पिता ओम प्रकाश का कहना है कि उनके जोर देने पर पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की, दो लोग जेल भेज दिए, लेकिन उनका बेटा आज तक न तो बरामद किया, न ही उसके बारे में कुछ बताया। वह अफसरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं।
केस-3
खेड़ा इस्लामपुर का 13 साल का सागर 21 जुलाई 2011 को लापता हुआ था। उसके पिता सेविंद्र का कहना है कि वह अपने बच्चे की बरामदगी के लिए अफसरों के चक्कर काटने के अलावा कोर्ट भी गए, लेकिन पुलिस ने सिर्फ आश्वासन दिए, आज तक बच्चा बरामद नहीं हुआ है। अब तो उसके बारे में पुलिस कुछ बताती भी नहीं है।

लगातार चल रहे हैं प्रयास : एसपी
बच्चों की गुमशुदगी पर एसपी जितेंद्र शाही का कहना है कि पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। कुछ बच्चे बरामद भी हुए हैं। जो बच्चे नहीं मिल रहे, उनके मामले अपहरण में तरमीम हुए हैं। ऐसे सभी मामलों की प्रगति की समीक्षा भी होती है।
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