रंछाड़ में चकबंदी अधिकारियों से भिड़े किसान

Baghpat Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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बिनौली। जिलाधिकारी के आदेश पर रंछाड़ गांव में फिर से शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया में रविवार को सेक्टर निकालने के लिए पहुंचे चकबंदी अधिकारियों और पुलिस को भारी विरोध झेलना पड़ा। खेत में जबरन ट्रैक्टर चलवा दिए जाने से गुस्साए किसानों और महिलाओं ने लाठी-डंडे लेकर चकबंदी अधिकारियों से हाथापाई की और ट्रैक्टरों के आगे लेटकर चकबंदी कार्य रुकवा दिया। इस दौरान महिलाओं ने एक ट्रैक्टर को लाठी-डंडों से प्रहार कर क्षतिग्रस्त कर दिया।
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जिलाधिकारी अजयदीप के आदेश पर रंछाड़ गांव में चकबंदी प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है। पिच्छौकरा गांव की सीमा से जिवाना-रंछाड़ मार्ग तक पैमाइश हो जाने के बाद रविवार को एसीओ चकबंदी श्रीकांत लक्ष्मी सरोज, लेखपाल रोहताश, जितेंद्र मोहन, मोहम्मद आजम पुलिस बल के साथ ट्रैक्टरों को लेकर सेक्टर निकालने पहुंचे और उन्होंने कार्य शुरू कराया। इसी बीच चकबंदी प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए काफी संख्या में किसान व महिलाएं वहां पहुंच गए और इसका विरोध किया। चकबंदी अधिकारी व पुलिस नहीं माने तो गुस्साए किसानों व महिलाआें ने लाठी-डंडे लेकर चकबंदी अधिकारियों और पुलिस से तीखी नोकझोंक करते हुए हंगामा शुरू कर दिया और अधिकारियों से हाथापाई तक कर डाली। इतना ही नहीं उन्होंने ट्रैक्टरों के आगे लेटकर चकबंदी कार्य रुकवा दिया और महिलाआें ने एक ट्रैक्टर को लाठी-डंडे से प्रहार कर क्षतिग्रस्त कर दिया।
चकबंदी प्रक्रिया रुक जाने के बाद थानाध्यक्ष बिनौली ने इसकी सूचना जिलाधिकारी और एसडीएम बड़ौत को दी। इसके बाद डीएम ने किसानों को अपनी समस्या रखने के लिए सोमवार दोपहर 12 बजे तक का समय दिया है। जिस पर किसान शांत हुए। अब किसान सोमवार को जिलाधिकारी से मिलेंगे और चकबंदी प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से कराए जाने की मांग करेंगे। विरोध करने वालों में पवन सिंह, ओमपाल सिंह, नारायण सिंह, चंद्रपाल सिंह, अजीत सिंह, कर्म सिंह, सुक्रमपाल, यशवीर सिंह, राजवीर सिंह आदि रहे।
34 वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया
बिनौली। रंछाड़ गांव में चकबंदी प्रक्रिया 34 वर्षों से चल रही है, लेकिन आज तक भी यह पूरी नहीं हो सकी है। चकबंदी को लेकर गांव के किसान दो फाड़ हो गए हैं। एक पक्ष का किसान तो चकबंदी चाहता है, जबकि दूसरे पक्ष का किसान चकबंदी प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगा रहा है और वे कहते हैं कि हमारी अच्छी कीमत की जमीन के बदले उन्हें कम दामों की जमीन दी जा रही है। उनके चकाें को अलग-अलग कई स्थानों पर काट दिया, पाइप लाइन का मुआवजा दूसरे किसान ले चुके हैं।

किसान की हो चुकी है हत्या
बिनौली। चकबंदी को लेकर नौ माह पहले गांव में एक किसान प्रवीण पुत्र महेंद्र की हत्या कर दी गई थी। तब तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने गांव की चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगाकर गांव की आम सहमति बन जाने के बाद ही चकबंदी कराने का ग्रामीणों को आश्वासन दिया था, लेकिन वर्ममान जिलाधिकारी अजय दीप ने अब चकबंदी अधिकारियों को रंछाड़ गांव की चकबंदी प्रक्रिया शीघ्र ही पूरा कराने के आदेश दिए हैं।
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