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चकबंदी पर तलब की रिपोर्ट

Baghpat Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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बागपत। चकबंदी की चक्की में पिस रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। चकबंदी आयुक्त ने बागपत जनपद में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के बारे में रिपोर्ट तलब की है। इसमें खास तौर पर तीन गांवों के बारे में जानकारी मांगी गई है। यहां आए दिन चकबंदी को लेकर टकराव हो रहा है।
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ये गांव हैं रंछाड़, अंगदपुर जोहड़ी और बरनावा। तीनों में चकबंदी को लेकर भारी नाराजगी है। कहीं अधिकारियों ने उलटे सीधे चक काट दिए हैं तो कहीं एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए दूसरे का नुकसान कर दिया गया है। इन्हीं आरोपों को लेकर कलक्ट्रेट पर आए दिन प्रदर्शन भी होता है।
प्रशासन के आला अफसर गांव में डेरा डालकर जांच पड़ताल कर चुके हैं लेकिन इसका कोई हल ऐसा हल नहीं निकल पाया जिससे विवाद समाप्त हो जाए। रंछाड़ में ज्यादा तनातनी है। इन तीनों गांवों से शासन को शिकायत भी की गई थी। अब चकबंदी आयुक्त ने तीनों गांवों के बारे में रिपोर्ट तलब की है। इसमें मालूम किया गया है कि विवाद क्या है और यह कब तक सुलझ जाएगा। चकबंदी विभाग के अधिकारी इसकी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि अगले हफ्ते चकबंदी आयुक्त लखनऊ में मीटिंग भी ले सकते हैं। इसमें बागपत के गांवों की चकबंदी प्रक्रिया का मुद्दा शामिल किया जा सकता है।

साल भर में सुलझेगा सीमा विवाद
बागपत। यूपी-हरियाणा सीमा विवाद सुलझने में अभी एक साल और लग सकता है। फिलहाल बागपत के निवाड़ा और सोनीपत के जाजल गांव में पैमाइश हो रही है। लेकिन इसकी भी रफ्तार काफी धीमी है। इसमें कई माह लग सकते हैं। इसके बाद 100 वर्ष पुराने जमीन रिकार्ड के अनुसार नए सिरे से राजस्व अभिलेख तैयार किए जाने हैं। वहीं बृहस्पतिवार को दोनों प्रदेशों के अफसरों के बीच होने वाली बैठक अफसरों के पास समयाभाव के कारण नहीं हो सकी।
अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा-पंजाब हाइकोर्ट ने 2011 में आदेश दिया था कि यह विवाद दो साल के भीतर सुलझ जाना चाहिए। इस पर रोहतक के कमिश्नर ने अधिसूचना भी जारी की थी। शायद यही वजह है कि हरियाणा के अधिकारी अपने पास एक साल और समय मानकर चल रहे हैं। दूसरी ओर यूपी की ओर से भी अफसर ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे। इस बारे में पूछे जाने पर एसडीएम प्रभुनाथ सिंह का कहना है कि अभी पैमाइश चल रही है। इसके बाद राजस्व अभिलेख दुरुस्त किए जाएंगे। इसमें समय लग सकता है। दोनों ओर के अधिकारी लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
लेट-लतीफी फिर खूनी संघर्ष का कारण बन सकती है। इस माह गेहूं की बुआई के समय दोनों प्रदेशों के किसान आमने सामने आ गए थे। कटाई के समय भी हर बाद फायरिंग होती है। अफसरों की बैठक के कारण उम्मीद थी कि कुछ न कुछ हल अवश्य निकल जाएगा। जिससे फसल को लेकर फसाद नहीं होगा, लेकिन अब इसकी संभावना बहुत कम नजर आ रही है।

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