जुक्कर चाहंगे, उक्कर चलेगी ट्रेन

Baghpat Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
बागपत। दिल्ली-ऋषिकेश ट्रेन में पीछे से तीसरे डिब्बे के गेट पर हैंडिल पकड़कर खड़ा बड़ौत का 12वीं का छात्र अंदर खड़े मुसाफिरों पर भड़क रहा है,- सामने से हट जा, वरना थूथड़ी छेत दूंगा। अंदर से आवाज आई, ट्रेन क्या तेरे बाप की है? सुनते ही तैश में आ गया और गाली देकर बोला, यू म्हारे रूट की ट्रेन है, हम जुक्कर चाहेंगे, उक्कर चलेगी। ज्यादा पैं-पैं करी तो बेगम काटकर हल्ला मचा दूंगा, दो मिनट में सारी हेकड़ी निकल जाएगी। उसका इतना कहना था कि रास्ता पल भर में खाली हो गया। फिर उसने कॉलर चढ़ा लिया।
दबंगई का ये सीन अग्रवाल मंडी टटीरी हाल्ट का है। ये तो बानगी भर है। दिल्ली-सहारनपुर रेलवे ट्रैक पर गुजरने वाली 24 ट्रेनों के एक लाख से ज्यादा मुसाफिरों को पूरे रास्ते ऐसी जहालत झेलनी पड़ती है, दबंगों की दहशत में रहना पड़ता है। पता नहीं, कब कोई दबंग खड़ा होकर लूटपाट शुरू कर दे, अथवा सीट खाली कराने के लिए मारपीट पर उतारू हो जाए।
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार दोपहर 12 से ढाई बजे के बीच दिल्ली-ऋषिकेश पेसेन्जर ट्रेन में अग्रवाल मंडी टटीरी से शामली तक सफर करके दबंगई का हाल देखा। बड़ौत में दबंग ट्रेन में चढ़ने के लिए गेट पर खड़े मुसाफिरों पर थप्पड़ बजा रहे थे, ना उन्हें कोई रोकने वाला था, ना टोकने वाला।
बच्चे सीने से लगाए, चेन कुंडल छिपाए
बड़का रेलवे हाल्ट आते ही इंजन से पांचवे डिब्बे में, जैसे ही दिल्ली से लौटे चार पांच दूधिए चलती ट्रेन से कूदने के लिए सीट से उठे, महिलाओं को ना जाने क्या लगा कि उन्होंने बच्चे सीने से लगा लिए और घूंघट करके चेन तथा कुंडल छुपा लिए। यह शायद गुरुवार की रात कांधला के पास पैसेंजर ट्रेन में पड़ी डकैती की दहशत थी। यही डर शायद ट्रेन के ड्राइवर के मन में भी था। बड़ौत से निकलते ही शामली तक उसने पेसेन्जर ट्रेन को एक्सप्रेस की रफ्तार से चलाया। इस बीच हम ट्रेन के पीछे की तरफ एक डब्बे में बैठे पुलिस एस्कोर्ट के पास पहुंच गए। हमने पुलिस वालों से पूछा, आप दबंगई रोकते क्यों नहीं? जवाब मिला, हम आज आरपीएफ का कैश ले जा रहे हैं। अगर चेकिंग के चक्कर में पड़े तो कहीं यह लुट ना जाए। इस सफर में शामली तक ना टीटी आया ना मजिस्ट्रेट चेकिंग हुई। मुसाफिरों ने बताया कि एक दो बार टीटी को ट्रेन से धक्का दे दिया गया था, तब से यहां टिकट चेकिंग ना के बराबर होती है।

बेगम काटना मतलब चेन पुलिंग
बागपत। मुसाफिरों ने बताया कि इस रूट पर चेन पुलिंग को दबंग बेगम काटना कहते हैं। यहां शाम को बदमाश लूटपाट करने के बाद चेन पुलिंग करके ट्रेन रुकवाकर ही भागते हैं। इस ट्रैक के दोनों ओर जंगल है। लुटेरे इनमें छिप जाते हैं।
खतरा है खतरा
--। खेकड़ा : यहां फकरपुर के पास यात्रियों को चलती ट्रेन से फेंके जाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
--। बागपत : अग्रवाल मंडी टटीरी और सूजरा में यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद लूटा जाता है।
--। बड़ौत : बड़का और बावली के बीच चलती ट्रेन में लूटपाट और मारपीट की घटनाएं होती रहती हैं।
--। शामली : कांधला और एलम के बीच लुटेरों का गैंग सक्रिय है जो बार बार वारदात कर रहा है।
--। सहारनपुर : नानौता और रामपुर मनिहारन के बीच लूट ज्यादा होती है। लुटेरे चेन पुलिंग करके भागते हैं।

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