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पुलिस ने ही सिर पर बिठाए माफिया

Baghpat Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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बागपत। माफिया, जो कल तक पुलिस वालों के सामने आंखें ही नहीं, गरदन भी झुकाकर खड़े रहते थे, अब उनमें इतनी हिम्मत आ गई कि वे आंख दिखाने लगाने लगे हैं। माफियाओं के गुर्गे सिपाही से कांपते थे, आज वे अफसरों को भी धमकाने लगे हैं। आखिर इन माफियाओं की इतनी जुर्रत कैसे हो गई कि चोरी के साथ सीनाजोरी भी करने लगे? अगर मामले की ठीक से जांच की जाए तो पुलिस वालों की भी गरदन फंस जाएगी। आखिर पुलिस ने ही तो खनन के इन खिलाड़ियों को अपने सिर पर बिठाया।
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रेत का खनन सीधे-सीधे दौलत के खजाने से जुड़ा है। अकेले खेड़ा हटाना से रोजाना 100 ट्रैक्टर ट्रॉलियां निकल जाती हैं। एक ट्रॉली 4000 से 4500 में बिकती है। एक गांव से हर रोज चार से पांच लाख तक खनन हो रहा है। यानी महीने में सवा से डेढ़ करोड़ जबकि खनन नदी के दोनों ओर लगभग 30-40 गांवों में हो रहा है।

ये पैसा अकेले माफिया की जेब में नहीं जाते। कई हिस्सेदार हैं इसके। कुछ दिन पहले बड़ौत में रेत का ट्रक पकड़े जाने पर एक दारोगा ने ट्रक मालिक से एक नेता का नाम बताया और उसे 50 हजार रुपये देने को कहा था। यानी खनन के इस गोरखधंधे में माफिया के साथ पुलिस और नेता भी शामिल हैं।
पुलिस पहले माफियाओं को ढील देती चली गई। अब माफिया उनके सिर पर बैठ गया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो शनिवार की रात छापामार कार्रवाई को सीओ ने गोपनीय रखा। माफियाओं ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जो पुलिस अब तक सब कुछ जानकर भी अनजान बनी है, वह छापा भी मार सकती है। अब पानी सिर से उतरता देख पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली है लेकिन इसमें दो सवाल हैं। नामजद आरोपी गिरफ्तार होंगे या नहीं? और जो अज्ञात में रखे गए हैं, उनके नाम खोले जाएंगे या नहीं? यह तो साफ हो ही गया है कि अगर अभी भी कड़े कदम नहीं उठाए गए तो माफिया बेलगाम हो जाएंगे।

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