गन्ने में प्रयोग से किसानों को परहेज

Baghpat Updated Sun, 07 Oct 2012 12:00 PM IST
बागपत। गन्ना किसानों को नई-नई वैरायटी के प्रयोग करने के लिए भले ही कितनी योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन तमाम सब्सिडी देने के बावजूद इनका ज्यादा असर नहीं हो पा रहा है। बागपत जैसे गन्ने के दीवाने जनपद में आज भी 84 फीसदी किसान को.शा. 767 जैसी पुरानी वैरायटी का ही गन्ना बो रहे हैं। वजह सख्त गन्ना होने की है। यह मजबूती इसे जंगली जानवरों से बचा देती है, जबकि ज्यादा मिठास वाली बाकी वैरायटी का गन्ना मुलायम होता है। इसमें रिकवरी तो ज्यादा है लेकिन जानवरों से बचना मुश्किल।
गन्ना विभाग शीघ्र पकने वाली प्रजाति में को.शा. 88230, 96268, को.से. 95436, 98231, 01235 तथा मध्य देर से पकने वाली को.शा. 767, 8432, 94257, 97261, 97264, 99259, यूपी 0097, को.से. 92423 और 95422 का बीज मुहैया कराता है। लेकिन 84 फीसदी किसान 767 ही बोते हैं।
को.शा. 88230 प्रजाति का गन्ना इतनी मीठा होता है कि इसे रसगुल्ला कहा जाता है। इसकी रिकवरी भी ज्यादा है, लेकिन बहुत मुलायम होता है। इसलिए इसे जानवर आसानी से चट कर जाते हैं। को.शा. 767 में 900 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक गन्ना होता है, जबकि नई प्रजाति 950 से 1000 कुंतल तक दे रही हैं। लेकिन किसान जानवरों के डर से इनसे परहेज कर रहे हैं।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में आधार प्रयोगशाला में तैयार नई प्रजाति के बीज लेने पर किसानों को सब्सिडी भी दी जा रही है, लेकिन इसका भी खास क्रेज नहीं है। निवाड़ा के किसान राजवीर बताते हैं कि उन्होंने दो बार रसगुल्ला बोया, लेकिन दोनों बार कीड़े लगे और जानवरों ने बहुत नुकसान किया।
बलि के पप्पू कहते हैं कि 767 बहुत सख्त होती है, इसे जानवर नहीं खा पाते। इसके अलावा यह सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम को आसानी से सहन कर जाती है। बाकी प्रजाति के गन्ने का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है।

गन्ने का गणित
जनपद में कृषि योग्य भूमि एक लाख तीन हजार 367 हेक्टेयर है।
इसमें 70 हजार 500 हेक्टेयर पर सिर्फ गन्ना बोया गया है।
गन्ने की 84 फीसदी फसल में को.शा. 767 वैरायटी बोई गई है।
को.शा. 8432 वैरायटी 4.67 और सीओपी 842112 1.69 प्रतिशत है।
बाकी 20 वैरायटी एक-एक फीसदी से भी कम लगाई गई हैं।

जानवरों का डर
करोड़ों रुपये की फसल हर साल जंगली जानवर खा जाते हैं।
गन्ने को नील गाय सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है।
जंगली सुअर भी पूरे के पूरे खेत ही तबाह कर दे रहे हैं।
को.शा. 767 वैरायटी का गन्ना सख्त होने से जानवरों से बच जाता है।
को.शा. 767 गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज भी ज्यादा आ रही है।

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