बिना बजट कैसे बने सचिवालय

Baghpat Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
बड़ौत। पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में सचिवालयों का निर्माण होना था। इसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं का गांव में ही समाधान करना था। यहां ग्राम पंचायतों की आय के लेखा-जोखा के अलावा ग्रामीणों का स्वास्थ्य बीमा, जॉब कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन आदि की व्यवस्था करने की योजना थी, लेकिन जनपद में इसके लिए बजट न होने से अधिकांश गांवों में सचिवालयों का निर्माण नहीं हो सका। हालांकि कहीं हुआ भी है तो वहां अधिकारी ही नहीं।
ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को बनी योजना के अंतर्गत पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवाें में सचिवालयों का निर्माण होना था। इनके निर्माण को तहसीलानुसार गांवों का चयन कर इनकी सूची बनाई गई थी। सूची के अनुसार बड़ौत तहसील के बिजरौल, लुहारी, बावली, शबका, हिलवाड़ी, बड़ौली, कंडेरा, बराल, महावतपुर, कोताना, वाजिदपुर, सिनौली, मलकपुर, बरवाला सहित कुल 14 गांवो में सचिवालयों का निर्माण होना था। उक्त सचिवालयों में ग्राम सचिव, ग्राम प्रधान के अलावा एक कंप्यूटर एवं जेई, आशा, स्वास्थ्य कर्मी और एएनएम की नियुक्ति होनी थी। इस संबंध में जब डीपीआरओ रामबाबू सक्सेना ने बताया कि जिले के गांवों में सचिवालयों के लिए बजट नहीं मिला। गत सप्ताह भी शासन को जिले में 11 अन्य सचिवालयों के निर्माण का प्रपोजल भेजा गया है। बजट मिलते ही इनका निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। साथ ही कहा कि जो सचिवालय पूर्ण हैं। उनमें ग्राम सचिव और ग्राम पंचायत अधिकारी समय-समय पर बैठते हैं।

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