सरकार की बेरुखी से मल्ल ‘चित’

Baghpat Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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बागपत। जिले के पहलवान सुविधाएं न मिलने के कारण पिछड़ रहे हैं। कई बार कुश्ती में जिले के मल्लों ने देश का नाम रोशन किया है, लेकिन उन्हें सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं दी गई। उसका नतीजा यह हुआ है कि यहां का कोई मल्ल ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया। अगर सुविधाएं दी जाती तो आज सुशील की तरह जिले के मल्ल भी ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करते।
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पहलवानों की जनपद में लंबी कतार है, और यहां पर अर्जुन अवार्ड, भारत केेसरी जैसे अवार्ड विजेता हैं। बागपत का नाम राजनीति से लेकर खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जमकर चमका है। अर्जुन अवार्डी शोकेंद्र तोमर, राजीव तोमर जैसे पहलवानों ने देश का नाम रोशन किया है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के साथ बागपत का नाम चमकाने वाले अंशु तोमर, सुनील राणा, गौतम पहलवान, अशोक पहलवान, प्रह्लाद, नरेंद्र पहलवान आदि दर्जनों नाम हैं। अकेले मलकपुर में ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आठ पहलवान हैं, जबकि जनपद में दोगुनी संख्या है। लेकिन बागपत का दुर्भाग्य कहें या फिर नई पीढ़ी के उभरते पहलवानों की बदनसीबी कि इतना सबकुछ होते हुए भी सरकार ने यहां पर कोई सुविधा नहीं दी है। यहां तक कि जिस टर्फ पर अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती होती है, उस टर्फ को भी अभी तक सरकार जिले को उपलब्ध नहीं करा सकी है, अन्य सुविधाओं की बात तो काफी दूर की है। अर्जुन अवार्ड विजेता शोकेंद्र तोमर कहते हैं कि देश के लिए दुर्भाग्य की बात है कि खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व राजनीति के अखाड़े से होकर गुजर रहा है। एमपी, एमएलए खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्हें खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। गन्ने की राजनीति में पूरे जनपद को उलझाकर रखा हुआ है। ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्हें सपोर्ट और थोड़ी सी भी सुविधा मिल जाती तो शायद ओलंपिक तालिका में गोल्ड का कॉलम खाली नहीं रहता। रहनुमा न मिल पाने पर गरीब परिवार का होनहार एक हद तक संघर्ष करने के बाद टूट जाता है, और सिर्फ यह सोच लेता है कि इस स्तर का खिलाड़ी तो बन जाए कि उसे अच्छी नौकरी मिल सके और अपना पेट भर ले। बाघू के राजू पहलवान कहते हैं कि सुशील ने देश के हर व्यक्ति को खुश होने का मौका दिया है। लेकिन जनपद की प्रतिभाओं को सुविधाएं न मिलने से वह आहत हैं।
अगले माह तक होगी गद्दे वाली टर्फ
जनपद के क्रीड़ा अधिकारी सतीश शर्मा कहते हैं कि अगले माह तक बागपत को गद्दे वाली टर्फ मिल जाएगी। इसके लिए वह काफी समय से प्रयास कर रहे थे। छह माह के लिए खेकड़ा में कोच रखा जा रहा है।
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