साढ़े 62 करोड़ से चमकेगी जनपद की तस्वीर

Baghpat Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
बागपत। जनपद के विकास के लिए इस बार 62 करोड़ 45 लाख रुपये की योजनाएं बनेंगी। जिला योजना के लिए सभी विभागों का बजट निर्धारित कर दिया गया है। 31 जुलाई तक सभी विभागों को अपने प्रस्ताव देने होंगे।
देर से ही सही शासन ने विकास की सुध तो ली। इस बार जिला योजना के लिए शासन ने पिछले वर्ष से लगभग दस करोड़ रुपये अधिक बजट निर्धारित किया है। योजना के माध्यम से 62 करोड़ 45 लाख रुपये के विकास कार्य का प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है। राज्य योजना आयोग से 22 करोड़ 24 लाख रुपये का अनुमोदित परिव्यय पास हो गया है। अब इन प्रस्तावों को लेकर जिला योजना की बैठक की जाएगी। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अभी सिर्फ बजट की सूचना मिली है।
प्रस्ताव अधिक, बजट कम
विकास के लिए प्रस्ताव तो काफी लंबे चौड़े बन रहे हैं, लेकिन बजट आधा भी नहीं दिया जा रहा। जो बजट मिलता है, उससे आधे जनपद को भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2010-11 में लगभग 42 करोड़ रुपये की जिला योजना के प्रस्ताव तैयार कराए गए, लेकिन मिले बीस करोड़ ही। 2011-12 में 52 करोड़ 55 लाख रुपये के प्रस्ताव तैयार किए, लेकिन मिले 23 करोड़ 10 लाख।
विकास की राह में रोड़ा बनी बिजली
जनपद का विकास करने के लिए कागजी कार्रवाई तो इतनी चल रही है कि बड़े शहरों को भी मात दे रही है, लेकिन सचमुच अभी कुछ नहीं हुआ है। जिले के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा यहां की बिजली व्यवस्था है। आपूर्ति को देखते हुए उद्योगपति यहां कारखाने तक नहीं लगाते हैं। उन्होंने दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद आदि शहरों में ही कारखाने लगा दिए हैं।
विकास के लिए पिछले डेढ़ दशक से योजनाएं बन रही हैं, एनसीआर प्लानिंग हर बार बन रही है, लेकिन सिर्फ दिखाने के लिए। पांच-छह वर्ष पूर्व तक खेकड़ा में 150 हैंडलूम कारखाने थे, जो धीरे-धीरे यहां से पलायन कर गए। अब यहां मात्र 10-12 हैंडलूम के कारखाने रह गए हैं। खेकड़ा से हैंडलूम कारखानों के पलायन करने के अन्य प्रमुख कारणों में बिजली की लगातार हो रही कटौती प्रमुख कारण है। ऐसा नहीं कि बागपत में इंडस्ट्रियल एरिया न हो, यहां। कलक्ट्रेट के पीछे इंडस्ट्रीज के लिए जमीन पड़ी है। बड़ौत में इंडस्ट्रियल पार्क बना हुआ है। यहां कई वर्षों से भूमि पड़ी है, लेकिन आज तक किसी भी इंडस्ट्री के निर्माण के लिए प्राधिकरण के पास एक भी नक्शा नहीं पहुंच सका है।
कोई आता ही नहीं उद्योग लगाने
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक डा. विनोद कुमार ने बताया कि सरकार ने सभी तरह की सुविधाएं दे रखी हैं, योजनाएं भी चला रखी हैं, लेकिन कोई उद्योग लगाने आता ही नहीं है। यहां उद्योग का कल्चर ही नजर नहीं आता।

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