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रिकवरी तय, संबंधितों पर हो सकती है एफआईआर

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 16 Oct 2019 10:57 PM IST
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आजमगढ़। देर से ही सही मार्टीनगंज तहसील भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर धांधली करने का मामला सामने आ गया। सीएम के निर्देश पर हुई जांच की रिपोर्ट साढ़े तीन महीने बाद डीएम को मिल गई। पीडब्ल्यूडी प्रयोगशाला की जांच में भेजा गया मलबा अधोमानक पाया गया है। तहसील भवन का निर्माण करोड़ों की लागत से पैक्सफेड की ओर से किया जा रहा था। रिकवरी के लिए आंकलन की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गई है। संबंधितों पर एफआईआर कराने के लिए अधिकारियों के नाम और पते जुटाए जा रहे हैं।
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मार्टीनगंज तहसील में आवासीय और अनावासीय भवन का निर्माण वर्ष 2015-16 से हो रहा है। आवासीय भवन का निर्माण कार्य यूपीआरएनएस (पैक्सफेड) की ओर से किया जा रहा है। निर्माण के लिए स्वीकृत 264.23 लाख की धनराशि खर्च करने के बाद भी निर्माण अभी तक अधूरा है। इस बीच कार्यदायी संस्था की ओर से पुनरक्षित 538.26 लाख का आंगणन भी मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया गया था। वहीं, अनावासीय भवन का निर्माण उप्र राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सरकारी संघ गोरखपुर (लैक्फेड) की ओर से 340.26 लाख की लागत से किया जा रहा है। इसमें शासन से मिली 240 लाख की धनराशि खर्च की जा चुकी थी। निर्माण अधूरा रहने पर संस्था की ओर से 803.74 लाख का पुनरक्षित आंगणन पेश किया गया था।
जून माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद दौरे के दौरान तहसील भवन के निर्माण में धांधली की शिकायत की गई थी। इस पर सीएम ने जांच के निर्देश डीएम एनपी सिंह को दिए थे। डीएम ने जांच के लिए एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन आरके त्रिपाठी की टीम बनाई थी। टीम ने जांच के बाद मलबे को जांच के लिए प्रयोगशाला सुल्तानपुर भेजा था। बाद में पीडब्ल्यूडी की लखनऊ प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को अब प्राप्त हो गई है। जांच में अनावासीय भवन की निर्माण सामग्री अधोमानक पाई गई है। डीएम एनपी सिंह ने रिपोर्ट मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी को रिकवरी के लिए आंकलन करने के निर्देश दिए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के लिए पीडब्ल्यूडी आंकलन करेगा कि कार्यदायी संस्था लैक्फेड से कितनी धनराशि की रिकवरी करनी है। इसके साथ ही कार्यदायी संस्थाओं से संबंधित तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम-पते आदि भी जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो संबंधितों पर एफआईआर की भी तैयारी की जा रही है।
दो माह तक घूमता रहा मलबा
जून माह में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डीएम की ओर से गठित टीम ने जांच कर मलबा सुल्तानपुर प्रयोगशाला भेज दिया था। किसी कारणवश वहां जांच नहीं हो सकी। अगस्त में यहां से मलबे को जांच के सिए बीएचयू भेजा गया, लेकिन वहां भी जांच नहीं हुई। इसके बाद मलबे को फिर जांच के लिए पीडब्ल्यूडी की लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट अक्तूबर में प्राप्त हुई है।
कमिश्नर पैक्सफेड पर दे चुकी हैं एफआईआर के आदेश
मार्टीनगंज तहसील से जुड़े मामले की एक अन्य जांच के बाद कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने पैक्सफेड के तत्कालीन अधिकारियों पर एफआईआर की संतुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी। हालांकि अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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