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निजीकरण का विरोध करेंगे विद्युत कर्मचारी

Azamgarh Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
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आजमगढ़। बिजली वितरण निगमों की पुनर्संरचना के नाम पर वितरण क्षेत्र का निजीकरण किए जाने के उ.प्र. सरकार के फैसले का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है। विद्युतकर्मियाें ने कहा कि वास्तविक सुधार के लिए मुख्यमंत्री अभियंताओं व कर्मचारियों को विश्वास में लेकर ठोस कार्ययोजना बनाएं ताकि ऊर्जा निगमों में निजीकरण के नाम पर टकराव न पैदा हो।
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विद्युत अभियंता संघ के सचिव ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि बिजली वितरण निगमों में घाटे का मुख्य कारण गलत ऊर्जा नीति एवं वित्तीय कुप्रबंधन है।
उन्होंने कहा कि विगत पांच वर्षों में 92000 करोड़ रुपये बिजली खरीद पर खर्च हुए हैं। इसकी आधी धनराशि भी सरकारी क्षेत्र में नई बिजली परियोजनाओं को लगाने पर खर्च किया गया होता तो बिजली का उत्पादन 9 हजार मेगावाट बढ़ गया होता और निजी क्षेत्र से बहुत अधिक दाम पर बिजली खरीदने को मजबूर न होना पड़ता। उन्होंने कहा कि तेरह वर्ष पूर्व घाटे के नाम पर विद्युत परिषद का विघटन कर ऊर्जा निगमों का गठन किया गया था। उस समय भी बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने इसका विरोध किया था। विघटन के समय सालाना घाटा 450 करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 13000 करोड़ सालाना हो गया है। ऐसे में वित्तीय पुनर्संरचना के नाम पर विद्युत वितरण क्षेत्र के निजीकरण को मंजूरी देना सरकार का गलत निर्णय है। विरोध करने वालों में इंजीनियर ओमप्रकाश पांडेय महासचिव अभियंता संघ, डीसी दीक्षित संगठन सचिव, आरएन यादव, एसडी सिंह अधिशासी अभियंता, वीसी कुमार, प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी, एसबी सिंह, आरएन मिश्र, मिथिलेश कुमार, हीरालाल मौर्य, एसएन मौर्य, मनीराम यादव, धीरज गुप्ता, दीपक कुमार, मनीष कुमार, अरुण कुमार सहित आदि उपखंड अधिकारी उपस्थित रहे।
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