विलुप्त हो रही लोकविधाओं की दिखेगी झलक

Azamgarh Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
आजमगढ़। हरिऔध कला भवन परिसर में मंगलवार से शुरू हो रहे चार दिवसीय आजमगढ़ रंग महोत्सव में अभी से ग्रामीण कलाकृतियों की झलक दिखने लगी है। महोत्सव की पहली शाम नाटक सम्राट पं.लक्ष्मीनारायण मिश्र को समर्पित होगी। आधुनिक चकाचौंध से दूर महोत्सव स्थल को सोमवार को रंगकर्मियों की टीम ग्रामीण कलाकृतियों से सजाने-संवारने में जुटी रही। कलाकारों के अथक प्रयास से हरिऔध कला भवन परिसर पूरी तरह ग्रामीण परिवेश में ढाल दिया गया। कलाभवन के टूटे-फूटे मंच को जहां थियेटर का रूप देकर उसे अतीत की ओर लौटाया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ लोक विधा से जुड़ी कलाओं को प्रदर्शित करने के लिए मुक्त आकाशीय मंच भी तैयार किया गया है।
बता दें कि जिले की साहित्य, कला, संस्कृति, लोकविधा, कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर रेखांकित करने के उद्देश्य से वर्ष 2004 से शुरू आजमगढ़ रंग महोत्सव का आयोजन इस बार सूत्रधार संस्था ने हरिऔध कलाभवन में करने का निर्णय लिया है।
महोत्सव की पूर्व संध्या पर रंगकर्मी वीरान पड़े कलाभवन परिसर को ग्रामीण परिवेश के रूप में कलाओं के जरिए रेखांकित करने में जुटे रहे। गांव के तालाब, डीह बाबा, ताड़,नारियल के पेड़ और ग्रामीण जन जीवन में प्रयोग आने वाली डलिया को रंगों से जान डाल कर सुसज्जित किया गया है। आरंगम-2012 के संयोजक अभिषेक पंडित ने बताया कि कार्यक्रम की पहली निशा नाटक सम्राट पं.लक्ष्मीनारायण मिश्र को समर्पित रहेगी। जन सहयोग से तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। कार्यक्रम संचालक एसके दत्ता ने बताया कि चार बजे कार्यक्रम का उद्घाटन होगा। इसके बाद लोकविधा से जुड़ी कलाओं की प्रस्तुति की जाएगी।



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