मनुष्य को विवेक देते हैं किताब-साहित्य

Azamgarh Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
आजमगढ़। नगर के आईटीआई मैदान में आजमगढ़ महोत्सव के दौरान सृजन परिवेश के वातावरण को निर्मित करते हुए लेखक से मिलिए कार्यक्रम में लेखक जगदीश चंद्र बरनवाल कुंद ने विमर्श के विषय की व्याख्या करते हुए कहा कि उर्दू साहित्य के निर्माण में आजमगढ़ की भूमिका को निकाल दिया जाए तो इसका इतिहास अधूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी से लेकर कैफी आजमी तक का लेखन राष्ट्र निर्माण की ऐसी प्रक्रिया है, जिसका इतिहास निर्माण में जीवंत योगदान है। मुख्य विकास अधिकारी अब्दुल समद ने कहा कि ज्ञान की धारा को महसूस किए बिना कोई उत्सव संपन्न नहीं हो सकता।
महोत्सव के किताबों की दुनिया विचार का स्वर है। एडीएम छोटेलाल ने कहा कि किताबें और साहित्य मनुष्य को विवेक देते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. वीबी सिंह ने कहा कि साहित्य संवेदनाओं को रीचार्ज करता है। कार्यक्रम को वरिष्ठ अधिकारी पुल्कित खरे, जिला विद्यालय निरीक्षक रामचेत, मौलाना उमैर सिद्दीकी नदवी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के शिक्षक डा. सूर्यनारायण, राजीव रंजन आदि ने संबोधित किया।
महोत्सव में मनोरंजन के लिए झूले
आजमगढ़। महोत्सव में शामिल होने वाले बच्चों के लिए मनोरंजन को भी एक हिस्सा बनाया गया है। आईटीआई मैदान के पंडाल के पीछे आकर्षक झूले भी लगाए गए हैं। इसमें फ्लाई झूला, ड्रैगन के अलावा बच्चों के लिए भी झूले लगाए गए हैं। महोत्सव में लोग झूले की प्रदर्शनी का भी आनंद उठा रहे हैं।

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