मासूमों की मौत, हैवानियत, गरीबी या कुछ और..

Azamgarh Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
आजमगढ़। निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकबारी उर्फ चकिया गांव में शनिवार को एक संग चारों बच्चियों की मौत की घटना से गांव दूसरे दिन भी नहीं उबर पाया। मासूमों की मौत का कारण हैवानियत, गरीबी है या फिर कुछ और है इस पर पर्दा पड़ा है। हालांकि इस रहस्य से पर्दा उठाने में पुलिस लगी है। लेकिन पुलिस इतनी देर से जागी कि मौके पर कोई सबूत और साक्ष्य नहीं मिला।
अपनी साख बचाने के लिए पुलिस ने भले ही देर रात को आनन-फानन में चौकीदार से तहरीर लेकर मासूमों के माता-पिता के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली। लेकिन पुलिस की भूमिका पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस वीरेंद्र के साथ साथ उसके बड़े भाई बांके के पुत्र सुरेंद्र गोड़ को भी हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
चकबारी के 12 पुरवे में से चकिया गांव भी एक है। यहां की कुल आबादी 3543 है। अभिलेखों में साक्षरता दर 80 प्रतिशत है। इस आबादी में 80 घर यादव परिवार, 40 घर गौड़, एक घर कानू बिरादरी और 35 घर दलित हैं। बावजूद इसके इस गांव का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रधान भी दूसरे पुरवे का है। मुख्य सड़क से यह गांव करीब चार किमी अंदर है। साधन और संसाधन की बात करें तो यहां प्राथमिक और जूनियर विद्यालय छोड़ कुछ भी नहीं है। सड़क के नाम पर चकरोड है, जिसे खड़ंजे का इंतजार है। सरकारी अस्पताल तो गांव से करीब 15 किमी दूरी पर स्थित है। ऐसे में इस गांव के रहने वालों को समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। अब मासूमों की मौत पर एक नजर डालें तो नामजद परिजनों के संग गांव के लोग भी कम दोषी नहीं है।
घनी आबादी व साक्षर होने के बाद भी बात करने पर जितने लोग उतनी बातेें घटना के पीछे हो रही हैं। यहां तक की शव दाह में भी उसके साथ-साथ रहे। लेकिन पुलिस या किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं दी। गांव निवासी एक महिला ने बताया कि बच्चियों को अस्पताल ले जाने के लिए आटो में लादा गया था, लेकिन तब तक उनकी मौत हो गई थी। दूसरी तरफ मां हौसिला की बात मानें तो सिर्फ बच्चियों को ओझा के पास ले जाया गया था। इतना ही नहीं ओझा उसके घर तक आया भी था। बच्चियों का शव अंतिम संस्कार के लिए कौन ले गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जबकि वीरेंद्र की माली हालत काफी गड़बड़ है। रहने को मकान नहीं, न ही सोने के लिए कायदे का बिस्तर है। एक बच्चे की लालसा में उसके छह पुत्रियां थीं। सबसे अंत में हौसिला एक पुत्र की मां बनी । जो डेढ़ वर्ष का है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि चार मासूमों की मौत हैवानियत, गरीबी या फिर कुछ और कारण से हुई।

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