अब घाघरा का कहर आशियाने और खेती में

Azamgarh Updated Thu, 09 Aug 2012 12:00 PM IST
लाटघाट। अब घाघरा नदी की बाढ़ का कहर बाढ़ पीड़ितों के आशियाने और खेती पर बरपने लगा है। लगभग पांच हजार एक्टेयर भूमि में बोई गई फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई। कटान से चक्की गांव में एक व्यक्ति की रिहायशी मंडई कट कर घाघरा की गोद में समा गई। इसके अलावा लगभग 30 मीटर खेती योग्य भूमि काटती हुई घाघरा आबादी की जमीन को भी निगलने को बेताब है। दर्जनों लोगों के आशियाना कटान के मुंहाने पर हैं। सरकारी नाव की व्यवस्था न होने से लगभग 50 गांवों के लोग बाढ़ में फंसे हैं। प्रशासन की तरफ से बचाव और राहत के नाम पर कोई खास प्रयास न किए जाने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। प्रशासन मात्र 13 नाव लगा कर खानापूर्ति कर रहा है। हालांकि 30 और नावें लगाने का दावा किया जा रहा है।
सगड़ी तहसील के महुला-गढ़वल बांध के उत्तर के लगभग 134 गांवों में लगभग 75 हजार की आबादी निवास करती है। यहां के लोग तकरीबन 25 हजार 941 हेक्टेयर भूमि में खरीफ की खेती करते हैं। पिछले एक सप्ताह से बाढ़ से लगभग पांच हजार हेक्टेयर धान और गन्ने की फसल डूबी पड़ी है।वहीं चक्की गांव में कटान से लोग दहशत में हैं। बुधवार को नदी दो सेमी. और बढ़ाव पर रही। डिघिया गेज पर 70.87 मीटर और बदरहुआ गेज पर 71.77 मीटर पर जल स्तर पहुंच जाने से खतरा टलने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। बदरहुआ गेज का लाल निशान 71.68 मीटर, डिघिया गेज का खतरा बिंदु 70.40 मीटर पर है। बदरहुआ गेज पर नदी के खतरे के निशान से नौ सेमी. और डिघिया गेज पर खतरे से 47 सेमी. ऊपर पहुंच जाने से लगभग 60 राजस्व गांव बाढ़ से घिर गए हैं। तटवर्ती चक्की गांव में कटान से लोग दहशतजदा है। बुधवार को रामलक्षन पुत्र कोमल की रिहायशी मंडई कट कर घाघरा में विलीन हो गई। भाई महेश की आबादी की जमीन कट रही है। आबादी की जमीन कटने के बाद दर्जन भर और लोगों के घर कटने के कगार पर हैं।हालातों से जूझ रहे बाढ़ पीड़ितों को मिट्टी का तेल, पशु चारा, दवा और नाव की सख्त जरूरत है। मगर प्रशासन राहत के नाम पर जो कुछ भी कर रहा है, ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।
60 राजस्व गांवों केघिरने के बाद भी प्रशासन मात्र 13 नाव चलवा रहा है। बाढ़ का जायजा लेने जा रहे अधिकारी बंधे से ही दिशा-निर्देश देकर लौट जा रहे हैं। एसडीएम सगड़ी रामनरेश पाठक ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को आने-जाने के लिए 13 नाव पहले से लगाई गई है। 30 नाव और लगाई जा रही है। अभी खाद्यान्न वितरण की जरूरत नहीं है। देवारा खास राजा और चक्की हाजीपुर गांव में मिट्टी का तेल वितरण करने के लिए सूची तैयार की जा रही है। बाढ़ से डूबी फसलों का अभी अंाकलन नहीं किया गया है।

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