पुनर्जागरण के महामानव थे रामविलास शर्मा

Azamgarh Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
लाटघाट। श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा के सभागार में शनिवार को ‘आलोचना का वर्तमान और रामविलास शर्मा’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें श्री शर्मा को पुनर्जागरण के महामानव बताया गया।
गोष्ठी अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्याम कश्यप ने कहा कि रामविलास शर्मा मार्क्सवादी विचारक थे। उन्होंने कहा कि रामविलास शर्मा ने आलोचक , साहित्यकार, भाषा वैज्ञानिक ,पुरातत्वविद, इतिहासकार, राजनीतिक आर्थिक और दार्शनिक विचारक रूप में कार्य किया। उन्हें तीन चिंता थी। एक आजाद और समता मूलक लोकतांत्रिक देश का निर्माण, दूसरा कश्मीर से कन्या कुमारी तक, अटक से कटक तक समझी जाने वाली भाषा और संपर्क भाषा के रूप में व्यवहार में आने वाली भाषा को सही स्थान दिलाना। यही नहीं मार्क्सवाद, लेनिनवाद के सिद्धांतों को और उसे व्यवहार में उतारने की रणनीति, कार्यनीति, भारत की खास परिस्थितियों में लागू करना उनका उद्देश्य था। श्री कश्यप ने कहा कि शुक्ल के बाद हिन्दी साहित्य विचार अपने उपनिवेशिक दायरे में बंद था। वह सही व सुनिष्ट इतिहास की खोज थी। 18वीं 19वीं शताब्दी के विज्ञान को जाइट कहा जाता था। रामविलास शर्मा 20वीं शताब्दी के अंतिम शिखर थे और पुनर्जागरण के महामानव थे। इस अवसर पर साहित्यकार संजय श्रीवास्तव ने कहा कि रामविलास जी आज हमारे आलोचना के प्रेरणास्रोत हैं। साहित्य का दायरा उनकी दृष्टि में जितनी व्यापक है, अगर उनका अल्पांक ही आज की आलोचना स्वीकार करें तो हम साहित्य को सोदृष्य बना सकेंगे और मूल्यांकन ठीक ढंग से कर सकेंगे। साहित्यकार दुर्गा प्रसाद गुप्त ने कहा कि हिन्दी की वर्तमान आलोचना में रामविलास की आलोचना का महत्व बढ़ जाता है। रामविलास जी अपने समय में अपने लेखन में जो उपनिवेशिक शक्तियों का प्रतिरोध कर रहे थे, भारतीय जनता के स्वप्न के आकांक्षाओं का समर्थन कर रहे थे, वह मूलबद्ध व प्रतिबद्ध लेखन कर रहे थे। आज देशी व विदेशी दोनों आलोचनाओं से लड़ना पड़ रहा है।
साहित्यकार विभूति नरायन ने रामविलास शर्मा की आलोचनाओं पर प्रकाश डाला। संचालन संतोष भदौरिया ने किया। इस अवसर एए फातमी, भारत भारद्वाज, श्रीप्रकाश मिश्र, संजय राय, विनोद कुमार शुक्ल, अशोक सिद्धार्थ, नरेन्द्र पुण्डरीक, सुरेन्द्र राही, गीता श्री, कांति शर्मा, रघुवंशमणि, जयप्रकाश धुमकेतू आदि उपस्थित रहे। स्वागत भाषण हीना देशाई ने किया।

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