घाघरा ने घर छीना, अस्पताल बन गया विवाह मंडप

Azamgarh Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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आजमगढ़। घाघरा की उफनती लहरें हर बरस देवारा के कई परिवारों के घरों को अपने आगोश में लेकर गांव का भूगोल बदल देती हैं। इसी के साथ मांगलिक उत्सव मनाने के लोगों के सपने भी घाघरा की धारा में विलीन हो जाते हैं। घाघरा की बाढ़ से बेघर हुए देवरांचल के पांच परिवार इस बात के प्रमाण बन हुए हैं। इन्हें अपनी लाडलियों का ब्याह घर के दरवाजे के बजाय अस्पताल परिसर से करना पड़ा।
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जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूरी यह अस्पताल पिछले तीन वर्ष से कटान पीडि़त पांच परिवारों की आपदा विपदा सुनने को आज तक भी कोई सामने नहीं आया है। वर्ष 2006-07 में प्रलयंकारी बाढ़ के आगोश में हाजीपुर का पूरा गांव आ गया था। लोगों की आंखों के सामने ही उनका आशियाना उजड़ गया। हाजीपुर में बेघर हो चुके नौ परिवारों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शरण दी गई। शेष ने बंधे का सहारा लिया। कटान पीडि़त आज भी अस्पताल में ही रहने को मजबूर हैं। बच्चा होता है तो इसी अस्पताल में छठी बरही मनाई जाती है तो इसी अस्पताल में और बेटियां ब्याहकर जाती हैं तो इसी अस्पताल से। जीउत बंधु की पुत्री बिंदु की शादी 20 जून 2010 , दलित मल्लाह की पुत्री संगीता और विधवा रामप्यारी की नतिनी संगीता पुत्री राजकुमार की शादी दो जून 2011, सीताराम मल्लाह की पुत्री रिंकू की शादी 17 मई 2011 और मेवालाल कुर्मी की पुत्री पुष्पा की शादी 29 फरवरी 2012 को हुई। गंभीरपुर थाना क्षेत्र के बनावें गांव निवासी राजकुमार की पुत्री संगीता नानी के साथ रहती थी। इनके अलावा मिश्री पुत्र खरपत्तू, रामहरि पुत्र पांचू, रामजन पुत्र विन्ध्याचल व मन्नूलाल पुत्र मूलचंद्र भी डेरा डाले हैं।
अस्पताल परिसर में कटान पीडि़तों का आशियाना बरबस ही यहां आने वाले ये लोगों को आकृष्ट करता है। अधिकारियों का दौरा लगता है तो इनकी बात भी उठती है। लेकिन न इनके हालात बदले हैं और न बदलने के लिए कोई पहल की गई है। यही वजह है कि कटान पीडि़त अस्पताल में और कर्मचारी बाहर बैठते हैं।
कब्जा न मिलने से खानाबदोश की जिंदगी
कटान पीडि़तों में कुछ को तो प्रशासन ने पट्टा दिलाया है, लेकिन अभी तक कब्जा नहीं दिलाया जा सका है। इसी लिए ये खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। -बंशराज, ग्राम प्रधान हाजीपुर
जमीन दिलाने का प्रयास होगा
हाजीपुर के कटान पीडि़तों को अगर जमीन नहीं मिली है तो उनको दिलाने का प्रयास किया जाएगा। जिन जमीनों पर अन्य लोगों का कब्जा है, उसे खाली कराकर विस्थापितों को मुहैया कराया जाएगा। -रामनरेश पाठक, एसडीएम सगड़ी।
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