कहीं ‘मेरिट’ तो कहीं ‘इंट्रेस’ पर होगा दाखिला

Azamgarh Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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आजमगढ़। पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में इस साल प्रवेश के लिए किसी तरह का कोई नियम नहीं बनाया गया है। विश्वविद्यालय की तो छोड़ दे स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग भी इस समस्या के प्रति लापरवाह हैं। इसका परिणाम है कि शहर क्षेत्र में स्थित महाविद्यालयोें में कहीं ‘मेरिट’ तो कहीं ‘इंट्रेस’ पर छात्रों का प्रवेश होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की भी बल्ले-बल्ले हैं। वह छात्रों से मोटी रकम वसूलकर प्रवेश ले रहे हैं। शहर के स्कूलों में भी मोटी रकम ली जा रही है।
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शहर के डीएवी महाविद्यालय में इस साल मेरिट के आधार पर छात्रों का प्रवेश लिया जा रहा है। यहां छात्रों को 50 रुपये में फार्म मिल रहा है। छात्र इसको भरकर जमा कर रहे हैं। इसके बाद मेरिट के आधार पर इनका सलेक्शन होगा। इसकी अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित की गयी है। डीएवी के प्राचार्य राहुल सिंह ने बताया कि बीए प्रथम वर्ष के छात्रों को विद्यालय से फार्म उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरी तरफ शिब्ली नेशनल महाविद्यालय में छात्रों का प्रवेश ‘इंट्रेस’ पर होगा। यहां पर फार्म विद्यालय परिसर में मौजूद बैंक से चार सौ रुपये शुल्क देने पर उपलब्ध हुआ। इतना ही नहीं इंटर स्तर की शिक्षा पर नजर डाले तो शिनेइंका में टेस्ट लिया गया है। शिब्ली महासविद्यालय में अभी तक प्राचार्य के प्रभार को लेकर विवाद चल रहा है। इसलिए कोई जानकारी नहीं मिल पायी। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में भी मनचाहा फार्म शुल्क लिया जा रहा है। इससे छात्रों का शोषण हो रहा है।
प्रवेश परीक्षा के नाम पर छात्रों का शोषण
आजमगढ़। भाजपा नेता व शिब्ली कालेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमाकांत मिश्रा ने कहा है कि प्रवेश परीक्षा के नाम पर छात्रों का शोषण किया जा रहा है। नि:शुल्क मिलने वाले फार्म को महाविद्यालय प्रशासन द्वारा 500-500 रुपये में बेचा जा रहा है। इसके कारण गरीब व निर्धन छात्र तो परेशान हैं ही, अन्य छात्र भी प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे उचित शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की दोहरीनीति से सभी छात्र परेशान हैं। एक तरफ इंट्रेस तो एक तरफ मेरिट के आधार पर प्रवेश हो रहा है।

अधिकार छीन जाने से हट गया हस्तक्षेप: रामचेत
अमर उजाला ब्यूरो
आजमगढ़। जिलाविद्यालय निरीक्षक रामचेत ने बताया कि अक्तूबर 2012 से जिलाविद्यालय निरीक्षकों के पास से महाविद्यालयों में हस्तक्षेप करने का अधिकार समाप्त कर दिया। इस कारण वे लोग अब महाविद्यालयों से कोई सरोकार नहीं रखते है। इससे पहले वे होने वाली गड़बडि़यों पर निगरानी और वेतन आहरण कराते थे।
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