सपा ने सिंबल नहीं दिया पर दे सकती है समर्थन

Azamgarh Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
आजमगढ़। शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर सपा ने निकाय चुनाव में किसी को पार्टी का सिंबल न देने का फैसला लिया था, लेकिन सपा के राजेश महुआरी की पत्नी का पर्चा निरस्त होने तथा दूसरे पदमाकर लाल के द्वारा पत्नी का परचा वापस ले लेने से सपा अब किसी भी प्रत्याशी को समर्थन दे सकती है। ऐसे में लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि इस बार भी वसुउद्दीन एडवोकेट की पत्नी सीमा को सपा का वाक ओवर मिलना तय हो गया है। बातचीत में सपा की तरफ से इस बात का इशारा भी मिला है। निर्णय लेने के बाद से सपाई प्रचार के लिए चुनाव मैदान में कूद भी सकते हैं।
बता दें कि नामांकन पूर्व ही नगर निकाय चुनाव में सपा और बसपा ने पार्टी के सिंबल पर चुनाव न लड़ने का फैसला लेकर भाजपा और कांग्रेस को वाक ओवर दे दिया था। कांग्रेस ने अधिकृत प्रत्याशी के रूप में कंचन गुप्ता पत्नी अशोक गुप्ता को जहां मैदान में उतारा है, वहीं पार्टी की सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को नजरंदाज कर इंदिरा पत्नी प्रहलाद को प्रत्याशी घोषित कर चुनावी जंग जीतने की फिराक में भाजपा की टीम जुट गई। वहीं कभी भाजपा की सक्रिय राजनीति में रहीं पार्टी का टिकट न मिलने पर संगीनी सचिव डा. माधुरी सिंह निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में जमी हैं। जबकि बसपा की अधिकृत प्रत्याशी निवर्तमान चेयरमैन शीला श्रीवास्तव को दूसरी बार अध्यक्ष पद पर कब्जा दिलाने के लिए बसपा जिला कमेटी जी जान से लगी है। दूसरी तरफ सपा हाई कमान से पार्टी सिंबल पर चुनाव न लड़ने की छूट मिलने पर पिछले तीन चुनावों में सपा प्रत्याशी रहे वसीउद्दीन अहमद एडवोकेट ने महिला सीट होने पर इस बार अपनी पत्नी सीमा को चुनाव मैदान में जहां उतार दिया, वहीं सपा कार्यकर्ता पद्माकर लाल वर्मा ने अपनी पत्नी तारा देवी की दावेदारी ठोक दी । सपा खेमे से दो नेताओं की पत्नियों के मैदान में कूद जाने पर सपा जिला कमेटी चाह कर भी चुनाव से अपने आप को दूरी बनाए रखी और अंदर ही अंदर किसी एक को लड़ाने की रणनीति पर काम करती रही। अंतत: सोमवार को नाम वापसी के दौरान तारा देवी को चुनाव मैदान से हटना पड़ गया। तारा देवी का चुनाव मैदान से हटना सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब सपा खेमे से सीमा पत्नी वसीउद्दीन ही चुनाव मैदान में रह गई है। इसकेअलावा निर्दल प्रत्याशी के रूप में सरवरी बेगम पत्नी सेराज, मंजू पत्नी रमेश, फातमा पुत्री अब्दुल रहमान भी लड़ाई के मैदान में हैं। सपा जिला अध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि अभी नगर निकाय चुनाव में किसी को समर्थन देने का निर्णय नहीं लिया गया है। मंगलवार को पार्टी कार्यालय पर आयोजित सपा की मासिक बैठक में नाम वापसी के बाद मैदान में रह गए प्रत्याशियों में किसी एक को समर्थन देने का निर्णय लिया जाएगा। इसी के साथ सपा कार्यकर्ता चुनावी जंग जीतने के लिए मैदान में होंगे।

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