मानव संसाधन मंत्री के बिल का विरोध करेंगे अधिवक्ता

Azamgarh Updated Sat, 09 Jun 2012 12:00 PM IST
आजमगढ़। संसद के आगामी सत्र में मानव संसाधन मंत्री द्वारा सदन में हायर स्टडी और रिसर्च बिल पेश किए जाने की तैयारी को देखते हुए अधिवक्ताओं ने बिल के विरोध का मन बनाया है। यह निर्णय अधिवक्ताओं ने उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के सदस्य परेश मिश्रा और अनिल प्रताप सिंह से हुई वार्ता के बाद ली है।
इस संबंध में दीवानी न्यायालय अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सचिदानंद राय और मंत्री जगदीश प्रसाद यादव ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि नई बाजार व्यवस्था को साम्राज्यवादियों के दबाव में स्वीकार कर चुके शासक वर्ग ने देश की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह बाजारू बना देने के बाद जब न्याय पालिका में सुधारों के नाम पर विदेशी दखलअंदाजी का रास्ता खोलने का मन बनाया लिया है। उक्त बिल के द्वारा विधिक शिक्षा पर बार कौंसिल आफ इंडिया तथा प्रदेश बार कौंसिल के नियंत्रण और मार्गदर्शन के अधिकारों को पूरी तरह समाप्त करके विदेशों के कारपोरेट जगत द्वारा विधिक शिक्षा और विधि व्यवस्था में निवेश की छूटे देने का प्राविधान किया जा रहा है। यह देश के संप्रभुता के विरुद्ध है। अधिवक्ताद्वय ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से बिल पेश न करने का अनुरोध किया है और उन्हें याद दिलाया है कि साम्राज्यवादियों के दबाव में पाकिस्तान के न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बंदी बनाने का प्रयास करने वाले परवेज मुशर्रफ के हर्ष से सबक लेना चाहिए।

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