बदले की आंच को समझौते की ‘छांव’ नहीं कर सकी ठंडी

Azamgarh Updated Sat, 26 May 2012 12:00 PM IST
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मेहनगर। स्थानीय थाने के टोडरपुर गांव के पास शुक्रवार को हुई बस संचालक की हत्या ने साबित कर दिया कि बदले की आंच को समझौते की छांव ठंडी नहीं कर सकी। इसका परिणाम रहा कि बदमाश ताबड़तोड़ फायरिंग कर बस मालिक को मौत की नींद सुला गए। अब तक की जांच के बाद पुलिस ने जो बताया और परिजनों से जो ज्ञात हुआ उसके अनुसार वर्ष 2007 में हुई रामजियावन की हत्या ही बस मालिक की हत्या का कारण बनी। हालांकि रामजियावन की हत्या के बाबत जितेंद्र सिंह और वादी पक्ष के बीच सुलह समझौता भी हो चुका था।
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जितेंद्र हाल ही में हत्या के इस मामले में जेल से जमानत पर रिहा होकर घर लौटा था। बता दें कि पांच साल पूर्व वर्ष 2007 में जितेंद्र के गांव के निवासी रामजियावन की हत्या हुई थी। इसमें जितेंद्र सिंह सहित तीन लोग नामजद हुए थे। जेल से जमानत पर छूटने के बाद जितेंद्र ने मृत रामजियावन के परिजनों से कोर्ट के जरिये सुलह कर लिया था। मुकदमे में समझौता होने के बाद से जितेंद्र दुश्मनी से बेफिक्र होकर जीवन जी रहा था। इस बीच शुक्रवार को बस संचालक जितेंद्र सिंह को बाइक सवार बदमाशों ने उसी तर्ज पर दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला, जिस तरह से वर्ष 2007 में रासेपुर बाजार में बस संचालक रामजियावन की गोली मार कर हत्या हुई थी। जितेंद्र की चिरैयाकोट-खरिहानी मार्ग पर तीन बसें और तीन जीपें चलती हैं। उनके गांव का निवासी रामजियावन यादव पुत्र चंद्रभान यादव चलने वाली वाहनों का नंबर लगाकर बदले में रुपया वसूलता था। जितेंद्र सिंह ने रामजियावन को रुपया देने से इंकार कर दिया। इसको लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ । परिणामस्वरूप बात बढ़ने पर रामजियावन की हत्या की घटना को एक पक्ष ने अंजाम दे दिया। इसमें जितेंद्र सिंह समेत तीन लोग नामजद हुए थे। रामजियावन की हत्या के आरोप में जेल में बंद जितेंद्र कुछ माह पूर्व जमानत पर रिहा होकर घर लौटा था। इसके बाद प्रयास कर वे अपने विपक्षी से सुलह-समझौता कर लिए थे। पुलिस की माने तो डेढ़ माह पूर्व कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गया था। सुलह से पहले जितेंद्र अपनी लाइसेंसी पिस्टल लगाकर चलते थे, लेकिन सुलह के बाद वे पिस्टल लगाना छोड़ दिए।
इस मामले में रहा आरोपी
बस संचालन में विवाद में 2007 में रासेपुर बाजार में बस संचालक रामजियावन की गोली मार कर हत्या हुई थी। हत्याकांड में जितेंद्र सिंह समेत तीन को आरोपी बनाया गया था। मामले में आरोपी जितेंद्र जेल में रहा। कुछ दिन पहले ही जेल से रिहा होकर घर आया था।
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