जेल से चुनाव लड़ने का अधिकार, वोट का नहीं

Azamgarh Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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आजमगढ़। जेल में रहते हुए चुनाव तो लड़ सकते हैं लेकिन जेल में निरुद्ध बंदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है। ऐसा पुराने नियम-कानूनों के चलते हैं। यही वजह है कि मंडल कारागार में निरुद्ध 938 बंदी वोट नहीं डाल पाएंगे।
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मंडल कारागार में कुल 938 बंदी हैं। इनमें 38 महिलाएं हैं। बंदियों के लिए नियमित अखबार मंगाया जाता है। पढ़ाई करने वालों को किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। आवश्यकता पड़ने पर बंदी कोर्ट के आदेश से अपनों के सुख-दुख में भी शामिल होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय से आदेश लेकर जेल प्रशासन अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराता है, लेकिन इन बंदियों को वोट देने का अधिकार नहीं रहता। दीवानी न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जगदंबा पांडेय ने इसके लिए लचर कानून व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि नियमानुसार न्यायिक अभिरक्षा में लिए गए किसी भी व्यक्ति की सारी स्वतंत्रता न्यायालय के अधीन हो जाती है। लेकिन जिला प्रशासन चाहे तो ये लोग भी मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रशासन न्यायालय से अनुमति लेकर जेल के भीतर वोटिंग मशीन लगवा सकता है। पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग वोट देने के लिए सबको प्रेरित कर रहा है। करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन बंदी वोट डालने से वंचित रह जाते हैं। इस संबंध में एडीएम (प्रशासन) आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि कानून में बंदियों के वोट देने की व्यवस्था नहीं है। जेल अधीक्षक अवधेश कुमार मिश्रा ने कहा कि जेल से चुनाव लड़ने की व्यवस्था है, लेकिन बंदियों के वोट देने जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
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