कोटेदारों की हड़ताल से ठंडा पड़ा स्कूलों का चूल्हा

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Wed, 26 Sep 2018 12:09 AM IST
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जहानागंज। कोटेदारों की हड़ताल से ज्यादातर प्राइमरी स्कूलों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं। इन विद्यालयों में एमडीएम का भोजन नहीं बनने पर बच्चे भूखे पेट पढ़ाई कर घर लौट जा रहा। वहीं कुछ स्कूलों के अध्यापक अपना पैसा लगवाकर बच्चों को भोजन करवा रहे हैं। उधर हड़तालरत कोटेदारों ने कहा कि हमारी मांग पूरी होने पर ही हड़ताल खत्म करेंगे। जहानागंज ब्लॉक में कुल 86 कोटेदार हैं। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते कई दिनों से कोटेदार हड़ताल पर हैं। कोटेदारों की हड़ताल होने की वजह से राशन का उठान नहीं हो रहा। ऐसे में गल्ला ना तो कार्ड धारकों को मिल रहा, ना ही एमडीएम का भोजन बनने के लिए स्कूलों में ही सप्लाई हो रही है। ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पेवठा और दौलताबाद, पूर्व माध्यमिक विद्यालय दौलताबाद के प्रधानाध्यापक सैयद अब्बास रिजवी, लोचन चौहान और हरिवंश सिंह ने बताया कि हम लोग दुकान से राशन खरीद कर अपने स्कूल में एमडीएम का भोजन बनवा रहे हैं। ताकि बच्चों को कोई परेशानी न हो सके। इन अध्यापकों के मुताबिक हर महीने की 22 से 31 तारीख तक अनाज की निकासी होती है। लेकिन कोटेदारों की हड़ताल की वजह से निकासी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में खाद्य विपणन अधिकारी मायाशंकर ने बताया कि हम लोग तो बैठे है, लेकिन कोटेदार हड़ताल पर है। इसलिए निकासी नही हो रही है। वही कोटेदार संघ के ब्लाक अध्यक्ष रामनाथ विशारद ने बताया कि यह हड़ताल पूरे प्रदेश मे है। हम लोगों की कुल सात मांग है। इसमें सबसे पहले राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत अनाज दुकान तक पहुंचाना। सरकार द्वारा निर्धारित गोदाम से कोटे के दुकान तक प्रति कु ंतल 5.75 की दर से अप्रैल 2001 से मई 2012 तक का भाड़ा भुगतान हो। पोस्ट मशीन से वितरण पर मशीन की गड़बड़ी की जिम्मेदारी टेक्निशियन की हो। कोटेदार न कहकर सरकारी कर्मचारी सेवक कहा जाय। अनाज के उठान वितरण का सत्यापन अधिकारी से न कराकर खाद्य सुरक्षा समिति से कराई जाय। आदि प्रमुख मांगें हैं।
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जहानागंज ब्लाक क्षेत्र में कुल 162 विद्यालयों में एमडीएम के तहत भोजन बनता है। कोटेदारों की हड़ताल की वजह से ज्यादातर स्कूलों में भोजन नहीं बन रहा। छह से सात अध्यापक अपने खर्च से भोजन बनवा रहे हैं। खाद्य विपणन अधिकारी से पत्र लिखा जाएगा कि वह स्कूलों का राशन भेजवा दें, ताकि भोजन बनता रहे। - क्षमा शंकर पांडेय, एबीएसए, जहानागंज
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