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झुलसा और माहू के प्रकोप से सतर्क रहें किसान

Updated Tue, 16 Jan 2018 12:29 AM IST
झुलसा और माहू के प्रकोप से सतर्क रहें किसान
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आजमगढ़। पाला और शीतलहर के कारण आलू और सरसो में सबसे ज्यादा रोग लगने की संभावना होती है। आलू में झुलसा रोग लगता है। जबकि अगर बदली हो जाए तो सरसो के पौधों में माहू कीट का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। ऐसा होने पर फसल प्रभावित हो सकती है। इसलिए इससे सतर्क रहने की जरूरत है और इनके लक्षण दिखें तो तत्काल उसका उपाय होना चाहिए।

जिला भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह मौर्य ने बताया कि वर्तमान समय में पाला और शीतलहर के कारण मौसम में आद्रता बढ़ जाती है। जिसके कारण आलू की फसल में पछेती झुलसा और सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप की प्रबल संभावना बढ़ जाती है। यदि बादल छाए हों तो ऐसी स्थिति में माहू कीट का प्रकोप बहुत तेजी से बढ़ता है। माहू कीट के नियंत्रण के लिए किसान भाई अपने खेत की नियमित रूप से निगरानी करते रहें। यदि खेत में माहू कीट का प्रकोप दिखाई पड़ता है तो उनके रोकथाम का उपाय तत्काल करें क्योंकि माहो कीट का मादा मैदानी क्षेत्रों में पार्थो जेनेसिस के द्वारा सीधे छोटे शिशु को जन्म देती है। इस कीट के प्रौढ़ एवं शिशु दोनो पौधों के कोमल तने, पत्तियों, फूलों और नई फलियों से रस चूस कर उसे कमजोर और छतिग्रस्त कर देते हैं। रस चूसते समय पत्तियों पर मधुश्राव भी करते हैं जिससे पौधे पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है। इससे पौधे के प्रकाश संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती है। जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है। इसलिए जिस पौधे पर माहू का प्रकोप दिखे उस पौधे के प्रभावित भाग को पौधे से अलग कर जमीन में गाड़ दें यदि माहू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है तो तत्काल डाई मैथिएट 30 ईसी या क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी की 1 लीटर मात्रा को 600 से 700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए। आलू की फसल में पछेती झुलसा के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 की 1.5 किग्रा मात्रा को 600 से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। यह सभी रसायन जनपद के सभी विकासखंडों में स्थापित कृषि रक्षा इकाई पर 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध है।

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