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न सिर्फ पिता की विरासत सहेजी...आगे भी निकले अखिलेश

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Fri, 24 May 2019 12:19 AM IST
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आजमगढ़। जनपद को ऐसे ही सपा का गढ़ नहीं कहा जाता है। यूं ही सपा संरक्षक या सपा मुखिया आजमगढ़ को अपना दूसरा घर नहीं कहते। गुरुवार को हुई मतगणना में जिस तरह वोटों के रूप में अखिलेश यादव को अपना प्यार दिया उसकी बदौलत अखिलेश यादव अपने पिता सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट को बचाने में कामयाब हो गए। हालांकि इस सीट पर उन्हें निरहुआ से कड़ी टक्कर मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मतगणना के बाद सारे कयासों पर विराम लग गया। निरहुआ को हर चक्र में पराजित करते हुए अखिलेश यादव ने अपने पिता से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की।
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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमाकांत यादव को टक्कर देने के लिए सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने आजमगढ़ से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। मतगणना के बाद जब परिणामों की घोषणा हुई तो उसमें मुलायम सिंह यादव लगभग 63 हजार मतों से विजयी घोषित किए गए। इस जीत की टीस सपा संरक्षक को आज भी सालती रहती है। इसका जिक्र वह कई बार सार्वजनिक रूप से मंच के माध्यम से भी कर चुके हैं। लेकिन जब 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी से चुनाव लड़ने की घोषणा की तो अखिलेश यादव अपने पिता की इस सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। वहीं भाजपा ने भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को प्रत्याशी बनाया। निरहुआ के प्रत्याशी बनते ही रमाकांत यादव ने कांग्रेस का दामन थाम लिया और पार्टी ने उन्हें भदोही से प्रत्याशी बना दिया। 12 मई को हुए मतदान में मेरा बूथ सबसे मजबूत का दावा करने वाली भाजपा सारे बूथों पर एजेंट तक नहीं तैनात कर सकी। लेकिन इसके बाद भी निरहुआ समर्थक और भाजपा के लोग कांटे की टक्कर होने का अंदाजा लगा रहे थे। पर गुरुवार को जब मतगणना के लिए ईवीएम खोली गई तो हर चक्र में अखिलेश निरहुआ पर भारी पड़ते गए। शुरू में बढ़त का आंकड़ा कुछ कम रहा लेकिन समय बढ़ने के साथ ही बढ़त का यह अंतर बढ़ता ही गया। कोई भी ऐसा चक्र नहीं था जिसमें निरहुआ अखिलेश पर भारी पड़ा हो। मुलायम सिंह यादव 2014 के लोकसभा चुनाव में जितने मतों से जीते थे उतने मतों से तो अखिलेश यादव ने कुछ चक्र की मतगणना के बाद ही जीत हासिल कर ली थी। 17 वें राउंड की गणना के बाद अखिलेश यादव पांच लाख से अधिक मत हासिल कर चुके थे। जबकि मुलायम सिंह यादव ने कुल तीन 46 हजार मत पाकर लगभग 63 हजार मतों से जीत हासिल किए थे। इस प्रकार अगर देखें तो अखिलेश यादव 17वें राउंड तक लगभग दो लाख से अधिक मतों से बढ़त बना चुके थे। आजमगढ़ की जनता ने जिस प्रकार अखिलेश को अपने प्यार के रूप में मतों का दान किया वह उनके जनपद में किए गए कार्यों को प्रतिफल है। लोगों के प्यार से जहां अखिलेश ने लंबी बढ़त के साथ जहां अपने पिता की टीस को कम किया वहीं अपने पिता के संसदीय सीट की विरासत को सहेजने में भी कामयाब रहे।

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