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खनन के चलते बदला घाघरा का रुख

Updated Mon, 05 Jun 2017 11:07 PM IST
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लाटघाट (आजमगढ़)। गोरखपुर के गोला और बड़हलगंज से सटकर बहने वाली घाघरा का रुख बालू खनन के चलते ही बदल गया। अब घाघरा ने महुला गढ़वल बांध की ओर रुख किया है, जिससे महुला गढ़वल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कटान रोकने का स्थायी इंतजाम नहीं किया गया तो महुला गढ़वल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। नदी का रुख देखकर इस इलाके के लोग तबाही की आशंका से अन्य स्थानों पर अपना आशियाना बनवाने लगे हैं।
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सगड़ी तहसील के दियारा में घाघरा नदी के किनारे बसे गांवों पर हमेशा कटान का खतरा बना रहता है। बालू खनन के कारण कटान का खतरा और बढ़ गया है। ढाई दशक में घाघरा कटान करते हुए सैकड़ों घरों को अपना निवाला बना चुकी है। कटान से विस्थापित हुए बहुत से अन्य गांवों में मकान बनाकर निवास दर रहे हैं लेकिन अभी बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें प्रशासन भूमि उपलब्ध नहीं करा सका है। ऐसे लोग बंधे और अस्पताल में आशियाना बनाए हुए हैं।

जनपद के सगड़ी तहसील के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाल घाघरा नदी के किनारे बने महुला गढ़वल बांध के बीच सफेद बालू है। इसी बालू को निकालने के लिए कई बार खूनी संघर्ष भी हो चुका है। पुलिस की मदद से खनन माफिया बालू का खनन करते हैं। खनन के बाद जब बालू के ऊपर से मिट्टी हट जाती है तो नदी तेजी से कटान होती है। पहले घाघरा नदी गोरखपुर जनपद के गोला और बड़हलगंज से सटकर बहती थी लेकिन बालू का अवैध खनन के कारण अब नदी कटान करते हुए महुला गढ़वल बांध से आकर सट गई है। घाघरा नदी उर्दिहा, रोशनगंज, धुसवा और ठीकहिया गांव का अस्तित्व समाप्त कर चुकी हैै। 1990 में घाघरा नदी ने उर्दिहा गांव के 450 घरों को अपनी धारा में विलीन कर लिया। 1990-91 में ही रोशनगंज गांव के आठ सौ घर घाघरा की गोद में समा गए। 2003 में चक्की गांव के लगभग 65 घरों को नदी ने अपने आगोश में ले लिया। वहीं 2004 में धुसवा गांव के 95 घर और 2005 में ठीकहिया गांव के 90 घर देखते ही देखते नदी में समा गए। लोगों का आशियाना उजड़ता गया और लोग यहां से खिसकते गए। जब नदी ने महुला गढ़वल बांध की ओर रुख किया तो अपना-अपना आशियाना दूसरी जगह पर बनाने में लग गए। उर्दिहा के लोग कोलवा, रोशनगंज के अराजी करखिहा, धुसवा और ठीकहिया के लोग बरडीहा, सहनूपुर और हाजीपुर में अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं। चक्की के लोग बंधे पर और अस्पताल में रह रहे हैं। इन लोगों को आज भी अपना आशियाना बनाने के लिए प्रशासन से मिलने वाली जमीन का इंतजार है। वहीं देवाराखास राजा गांव के लोग गोरखपुर के गोला और उरूवा में जाकर बस गए।

परिवार बंधे पर रहने को मजबूर
लाटघाट। घाघरा की कटान से बेघर हुए चक्की गांव के केदार, बेचन, कलावती, मुसाफिर महुला गढ़वल बांध पर झोपड़ी डालकर रहने के लिए मजबूर हैं। इनकी पूरी जीवनचर्या बंधे पर ही व्यतीत होती है। इनके घर 2003-04 में कटान के चलते घाघरा में विलीन हो गया था। कटान के चलते चक्की गांव टापू में तब्दील हो गया। पीड़ितों का कहना है कि अभी तक आवास नहीं मिला जिसके कारण बंधे पर रहना मजबूरी है। वहीं कुछ लोग अस्पताल में अपनी जीवनचर्या बिता रहे हैं ।

विस्थापितों के लिए जमीन की व्यवस्था की जाएगी। वहीं खनन की सूचना मिलने पर सख्त कार्रवाई करते हुए इसे रोका जाएगा। जो भी दोषी होंगे उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। - हीरालाल, तहसीलदार सगड़ी

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