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खेतों में फसल चट कर रहे अन्ना गोवंश

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Mon, 26 Aug 2019 12:45 AM IST
Anna Govans are harvesting crops in the fields
Anna Govans are harvesting crops in the fields - फोटो : AURAIYA
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रुरुगंज(औरैया)। क्षेत्र के गांवों में किसान खेतों पर डेरा डाले हैं। रात-रात भर जागकर फसल की रखवाली करना किसानों की मजबूरी बनी हुई है। प्रतिदिन औसतन किसानों की दो से तीन बीघा की फसल अन्ना गोवंश का निवाला बन रही है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में जिला पंचायत के कोष से गोशाला का निर्माण शुरू हुआ था पर अब तक नहीं बन सकी है। इससे क्षेत्र का किसान परेशान है। टार्च की रोशनी में अन्ना गोवंश को हांकने और उन्हें खदेड़ने की प्रक्रिया रोज का शगल बन चुका है।
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रुरुगंज कस्बे से लेकर खेतों तक में अन्ना गोवंश का झुंड का झुंड दिखाई दे रहा है। कस्बे के मार्गों में अन्ना गोवंश का झुंड विचरण करता हुआ कभी भी देखा जा सकता है। इससे हादसे भी हो रहे हैं लेकिन कोई भी इन अन्ना गोवंश को पकड़ने की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। नगर पंचायत प्रशासन भी इन अन्ना गोवंश से हार मान चुका है। रुरुगंज कस्बे में जिला पंचायत कोष से बन रही गोशाला का कार्य तेजी से न होने पर किसान परेशान हैं। किसान सरकार को कोसते हैं। किसान मान सिंह, बालकराम का कहना है कि धान, मक्का बाजरा की खड़ी फसल को दिन रात फसल रखानी पड़ रही है। ग्राम कुसमरा, रुरुकला, साहपुर, विराउसर, बरकपुरवा, गांव के खेतों और सड़कों पर अन्ना गोवंश नजर आ रहे हैं। किसानों को बरसात में भी खुले आसमान के नीचे जागकर रात बितानी पड़ रही है।
रुरुगंज (औरैया)। ग्राम पंचायत पुरवा पीता राम में लगभग 32 बीघा का चरागाह पड़ा हुआ है। कुछ माह पूर्व एसडीएम के आदेश के बाद दबंगों से जमीन खाली कराई गई थी। कुछ दिनों बाद फिर से लोगों ने उस पर झोपड़ी आदि रख कर कब्जा कर लिया है। किसानों का कहना हैं अगर इस भूमि में गोशाला का निर्माण कराया जाए तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।
किसान रमेश चन्द्र निवासी रुरुगंज ने बताया कि उन्होंने दो बीघा में बाजरा की फसल बोई थी जिसको अन्ना गोवंश अपना निवाला बना गए। इस फसल को तैयार करने में उनकी अनुमानित लागत तीन हजार रुपये आई थी, प्रशासन के कोई इंतजाम न किए जाने से वह इस साल बिन फसल के ही गुजारा करेंगे।
किसान सुरेेद्र कुमार दोहरे निवासी पुर्वा पीताराम ने बताया कि उन्होंने डेढ़ बीघा में मक्के की फसल बोई थी। फसल को अन्ना गोवंश से बचाने के लिए खेत के चारों तरफ तार भी बांध दिया था पर अन्ना गोवंश ने लकड़ी तोड़ कर घुस गए और फसल बर्बाद कर दी। इसकी लागत 2500 रुपये थी।
किसान अवधेश कुमार राजपूत निवासी चंदिया ने बताया कि लगभग तीन बीघा से अधिक खेत में उत्पादन के लिए हरी सब्जियों की फसल बोई थी जिसमें लौकी, भिंडी, तरोई, टमाटर की फसल को उजाड़ दिया। आधा सैकड़ा जानवरों का झुंड खेत में घुस कर नष्ट कर देते हैं। रात भर रखवाली के बावजूद फसल को नहीं बचा पा रहे हैं। इसकी अनुमानित लागत लगभग दस हजार से अधिक है।
किसान शिवम यादव निवासी रुरुकला ने बताया कि शासन से लगतार गोशाला के लिए बजट भेजा जा रहा है लेकिन अधिकारी इस ओर कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे सड़कों पर घूम रहे अन्ना जानवर लोगों के हादसे का कारण बन रहे हैं।
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