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नवजात की मौत पर भड़के लोग, अफसरों को घेरा

Auraiya Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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बिधूना (औरैया)। घर में प्रसव होने के बाद परिवार वाले प्रसूता और नवजात को दिखाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां पर गेट पर ताला पड़ा होने पर तोड़कर लोग दोनों को वार्ड तक ले गए। प्रभारी चिकित्साधिकारी के निर्देश पर भी इलाज में देरी होने पर नवजात ने दम तोड़ दिया। इससे आक्रोशित लोगों ने सड़क पर जाम लगाकर अस्पताल प्रशासन और डाक्टरों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। टीकाकरण का जायजा लेकर लौट रहे डिप्टी सीएमओ और एडीशनल सीएमओ का भी घेराव किया। दोनों अधिकारियों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन पर जाम समाप्त हुआ।
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ग्राम बझेरा निवासी सुशील कुमार की पत्नी ऊषा देवी के गर्भवती होने पर उसका चेकअप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में होता था। बुधवार को अचानक प्रसव पीड़ा होने पर उसने घर में ही शिशु को जन्म दिया। इसके बाद परिवार वाले दोनों को किसी तरह साधन कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। परिवारवालों के साथ पड़ोसी भी थे। अस्पताल पहुंचने पर गेट पर ताला लगा था। आवाज देने के बाद भी ताला न खुलने पर पड़ोसियों ने ताला तोड़ दिया और दोनों को अस्पताल के अंदर ले गए। इसकी सूचना मिलते ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. चंद्रशेखर भी पहुंच गए। उन्होंने एएनएम और स्टाफ को जच्चा-बच्चा की उचित देखभाल के आदेश दिए। इसके बाद भी शिशु को इलाज नहीं मुहैया कराया गया। थोड़ी देर बाद शिशु की मौत हो गई। इस पर गुस्साए लोगों ने अछल्दा-बिधूना मार्ग पर बबूल का कांटे डालकर जाम लगा दिया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन और डाक्टर के खिलाफ नारेबाजी की। इसी दौरान नवीन स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण का जायजा लेकर लौट रहे डिप्टी सीएमओ डा. अशोक कुमार और एडीशनल सीएमओ डा. मेजर रनवीर सिंह को आक्रोशित नागरिकों ने घेर लिया। अधिकारियों ने शिकायती प्रार्थना के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर करीब एक घंटे बाद जाम खुल सका। डिप्टी सीएमओ ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि मारुति वैन चलाने वाला गेट पर ताला डाल देता है। ताकि कोई मरीज यहां आए तो उसे मारुति वैन से लेकर नए भवन में जाने के लिए मनमाना किराया वसूला जा सके। इस बारे में सीएमओ को पूरी रिपोर्ट दी जा रही है। सीएमओ डा. करन सिंह ने बताया कि गेट पर ताला डालने की जानकारी उन्हें मिली है। वे उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। नए और पुराने भवन के चक्कर में मरीजों को परेशानी होती है। गांव वालों की मांग है कि पुराने अस्पताल में ही काम कराया जाए। इस बारे में उच्चाधिकारियों से दिशा निर्देश मांगे गए हैं।
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