सुखों का बलिदान देने वाला ही समाज को सुख दे सकता है

Auraiya Updated Mon, 25 Nov 2013 05:42 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
औरैया। शहर के पुराना नुमाइश मैदान में चल रही श्रीराम कथा के अंतिम दिन की कथा सुनाते हुए आचार्य रामांशी जी महाराज ने कहा कि जनकल्याण हेतु श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ नंगे पांव काटों व पहाड़ों पर चले।
विज्ञापन

कथा सुनाते हुए रामांशी जी महाराज ने कहा कि श्रीराम ने वनवास में उन्होंने भाई व पत्नी के साथ कष्टमय जीवन व्यतीत किया किंतु साहस नहीं छोड़ा और आगे बढ़ते रहे। परंतु अपने जनकल्याण संत धर्म अभियान से विचलित नही हुए और आगे बढ़ते रहे और बंदर भालू, जो भी जुड़ा प्रभु उसके सहयोग से अधर्म का विनाश अभियान तेज किया।
कहा कि जब कोई समाज देश सुधार का प्रण करता है तो उसे अपने निहित स्वार्थ का ख्याल भी दिल में लाना पाप है। सत्य है अपने सुखों का बलिदान करने वाला समाज को सुख दे सकता है। जैसे प्रभु श्रीराम ने अपने सुखों का बलिदान कर समाज को सुख देने का सत्य हदय से प्रयास किया। यहीं सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि इससे हमें शिक्षा मिलती है कि यदि समाज को सुधारने का संकल्प हो तो पहले अपने सुखों को सीमित करें और श्रीराम के आदर्शो का पालन करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us