झलकारी बाई के साहस को सराहा

Auraiya Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
फफूंद(औरैया)। कबीर सेना की ओर से गेल वाटिका गेस्ट हाउस में अमर शहीद वीरांगना झलकारी बाई का 183 वां जन्मोत्सव मनाया गया।
गेल वाटिका गेस्ट हाउस में बाल किशोर न्यायपीठ औरैया के चेयरमैन डा. जीएन द्विवेदी ने कहा कि अमर शहीद झलकारी बाई कोई साधारण महिला नहीं थी। उनके पराक्रम और साहस का इतिहास गवाह है। रानी लक्ष्मीबाई के समान ही उनकी वीरता की कहानी है। डा. नितिन वर्मा ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि आप लोगों के बीच में आने का मौका मिला। अपने पिता डा. महेश वर्मा के पद चिह्नों पर चलकर आप लोगों की सेवा करना हमारी प्राथमिकता होगी। हमारे देश में समय समय पर अमर शहीदों को यादकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। मो. अनाश ने काव्य रचना प्रस्तुत की। कबीर सेना के प्रांतीय संयोजक बेचेलाल कोरी ने कहा कि अमर शहीद वीरांगना झलकारी बाई का जन्मोत्सव मनाने के लिए हम लोग मौजूद हुए हैं। एक साहसी महिला ने अपने पराक्रम के बलबूते पर अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया था। गांव की भोलीभाली लड़की ने ऐसा जज्बा दिखाया कि आज भी लोग याद करते हैं। इससे पहले अमर शहीद झलकारी बाई की प्रतिमा पर डा. जीएन द्विवेदी, डा. नितिन वर्मा, सभासद कमला देवी, रमेश चंद्र, बसपा नेता जगत सिंह दोहरे, शिक्षक सलीम खां, समाजसेवी मानवेंद्र पोरवाल, जगदीश नारायण तिवारी, डा. अजित द्विवेदी, सत्यनारायण तिवारी, सपा नगर अध्यक्ष सत्तार कुरैशी, नगर पंचायत प्रतिनिधि इजहार अहमद मेव, चंद्रावती दुबे, गौरव वर्मा, धर्मेश शुक्ला, रामजी मिश्रा, अंशू शुक्ला आदि ने पुष्पांजलि दी।
इनसेट
तलवारबाजी में माहिर
थीं झलकारी बाई
औरैया। भाजपा की ओर से संस्कृत पाठशाला में शहीद वीरांगना झलकारी बाई का जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया। अध्यक्षता भाजपा नेता डा. सर्वेश कुमार कठेरिया ने की। वीरांगना झलकारी बाई के चित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। पूर्व विधायक छक्कीलाल वर्मा ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की रक्षा के लिए झलकारी बाई ने अहम भूमिका निभाई थी। किले में चारों ओर से अंग्रेजों से घिरी रानी लक्ष्मीबाई को बचाने के लिए झलकारी बाई ने अंग्रेजों की अंाखों में धूल झोंकते हुए तलवारबाजी से उन्हें परास्त किया था। लेकिन अधिक समय तक अंग्रेजों की फौज के आगे वह टिक न सकीं। डा. सर्वेश कुमार कठेरिया ने कहा कि हमें झलकारी बाई के बलिदान को भूलना नहीं चाहिए। हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने बचपन में एक बार झलकारी बाई का जंगली शेर से भी सामना हुआ था। इसमें उन्होंने शेर को परास्त कर वीरता का परिचय दिया था। कृष्ण चंद्र सावरन, अभय प्रताप सिंह सेंगर, श्यामू अवस्थी, श्रीराम मिश्रा आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर मोनू ठाकुर, गोविंद द्विेदी, विष्णुदत्त शुक्ला, शशांक अग्रवाल, इंद्रपाल सिंह, भारत सिंह, हरीश द्विवेदी, जितेंद्र कठेरिया, आशीष कठेरिया, देवेंद्र कठेरिया, बृजकिशोर राजपूत, सुधीर कुमार, रामऔतार, सुदर्शन लाल, हिमांशु सेंगर, डा. श्याम सिंह कठेरिया आदि मौजूद रहे।

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