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छह दिन में उम्रकैद: अक्सर 14 साल की बेटी से दुष्कर्म करता था बाप, मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद घरवालों के उड़ गए थे होश

अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 28 Jun 2022 04:36 PM IST
सार

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपी पिता को छह दिन के भीतर उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। पीड़िता सात महीने की गर्भवती है। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि छह दिन के भीतर सजा सुनाए जाने का उत्तर प्रदेश में यह पहला मामला है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

अमरोहा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के आरोपी पिता को छह दिन के भीतर उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 53 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पीड़िता सात महीने की गर्भवती है। जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। गिरफ्तारी के बाद से ही दोषी पिता जेल में बंद है, उसे जमानत नहीं  मिल सकी थी।



यह घटना डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। यहां रहने वाला 50 वर्षीय व्यक्ति ईट-भट्ठा पर मजदूरी करता था। करीब आठ महीने पहले परिजनों की अनुपस्थिति में उसने अपनी साढ़े 14 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। जिसके बाद वह लगातार डरा धमका कर अपनी बेटी को हवस का शिकार बना रहा था। जब भी परिजन घर से बाहर होते थे, तभी वह अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करता था। किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी देता था।

इसी बीच किशोरी गर्भवती हो गई। 11 जून को किशोरी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद परिजनों ने एक केंद्र पर किशोरी का अल्ट्रासाउंड कराया। जिसमें पीड़िता सात महीने की गर्भवती पाई गई थी, रिपोर्ट सामने आने के बाद परिजनों के होश उड़ गए। 

मां और भाई के पूछने पर किशोरी ने आपबीती सुना दी। 14 जून को बेटे ने अपने पिता के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की विवेचना डिडौली कोतवाली के एसएसआई सुक्रमपाल सिंह राणा ने की। उन्होंने 22 जून को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। यह मुकदमा 23 जून को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (पॉक्सो एक्ट प्रथम) अवधेश कुमार सिंह की अदालत में पहुंचा।

पहले ही दिन न्यायालय ने मामले में सुनवाई कर मुकदमे को ट्रायल पर ले लिया। इस मामले में पीड़िता, उसके भाई, मां, महिला चिकित्सक, एक स्कूल के प्रधानाचार्य, रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर, महिला कांस्टेबल ने मुकदमे से संबंधित न्यायालय के सामने अपनी गवाही पेश की। सोमवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने अभियोजन और आरोपी पक्ष को सुना। अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने जोरदार पैरवी की।

मंगलवार को फिर न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की और उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। न्यायालय ने साक्ष्य व सबूतों के आधार पर आरोपी पिता को दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पिता पर 53 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को सौंपने के आदेश दिए हैं। विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने बताया कि छह दिन के भीतर सजा सुनाए जाने का उत्तर प्रदेश में यह पहला मामला है। नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी पिता को छह दिन के भीतर सजा होने का मामला चर्चा का विषय बन गया।
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