महज 18 प्रतिशत पूरा हुआ धान खरीद का लक्ष्य

AmbedkarNagar Updated Mon, 03 Mar 2014 05:30 AM IST
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अंबेडकरनगर। विभिन्न धान खरीद एजेंसियों के पास लगभग छह करोड़ रुपये बचे रह गए, लेकिन धान की खरीद नहीं की गई। 28 फरवरी को धान खरीद बंद होने तक सरकारी एजेंसियों ने तो सिर्फ साढ़े 15 प्रतिशत ही खरीद की थी, लेकिन कुछ आढ़तियों को मिलाकर लक्ष्य के सापेक्ष लगभग सवा 18 प्रतिशत धान खरीद की गई। 74 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष जिले में सिर्फ 11 हजार 477 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका। इसके सापेक्ष किसानों को लगभग 16 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
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धान खरीद के लिए प्रशासन ने जिले में कुल 55 क्रय केंद्रों की स्थापना की थी। हाइब्रिड धान से चावल की रिकवरी के प्रतिशत को लेकर उत्पन्न विवादों का नतीजा रहा कि केंद्रों पर धान खरीद प्राय: ठप पड़ी रही। 74 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य जिले को निर्धारित था, लेकिन सिर्फ 11 हजार 477 मीट्रिक टन धान की खरीद हो सकी। 28 फरवरी को प्रशासन ने धान खरीद बंद कर दी। विभिन्न एजेंसियों व आढ़तों को मिलाकर किसानों को 15 करोड़ 98 लाख 59 हजार 90 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि खातों में छह करोड़ से अधिक की रकम पड़ी रह गई। इस धनराशि से किसानों के धान की खरीददारी की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
खाद्य विभाग के खाते में 84 लाख 22 हजार 944 रुपये, पीसीएफ के खाते में तीन लाख 24 हजार 46 रुपये, यूपीएसएस के खाते में दो लाख 55 हजार 900 रुपये, कर्मचारी कल्याण निगम के खाते में 14 लाख 42 हजार रुपये, एनसीसीएफ के खाते में चार लाख 44 हजार 140 रुपये, जबकि भारतीय खाद्य निगम के खाते में चार करोड़ 94 लाख 22 हजार 28 हजार रुपये बचे रह गए। यूपी स्टेट एग्रो के खाते में पैसा नहीं बचा। उल्टे उसे 14 लाख 30 हजार 670 रुपये का भुगतान करना शेष रह गया है। सरकारी एजेंसियों को मिलाकर लगभग छह करोड़ की रकम बच गई, जिससे धान खरीद हो सकती थी।
किसान रामानंद यादव व प्रभुदयाल का कहना है कि अधिकारियों ने धान खरीद में रुचि ही नहीं दिखाई। इसी वजह से 20 प्रतिशत धान की खरीद भी नहीं हो पाई। किसानों को कम दामों पर खुले बाजारों में धान बेचना पड़ा। किसान नेता रमाशंकर कहते हैं कि इस वर्ष किसानों के साथ प्रशासन ने पूरी तरह ज्यादती की। उसे अब गेहूं खरीद में ध्यान देना होगा। उधर, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी आरएस यादव कहते हैं केंद्रों तक पहुंचने वाले किसानों के धान की खरीददारी की गई। खरीद की पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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