सिर्फ फाइलों में ही खुशहाल नजर आते हैं पेंशन धारक

AmbedkarNagar Updated Sun, 26 Jan 2014 05:46 AM IST
अंबेडकरनगर। समाजवादी पेंशन योजना शुरू करने की तैयारी सरकार ने भले ही कर रखी हो, लेकिन जिले में पहले से चल रही पेंशन योजनाओं की हालत पटरी पर नहीं है। कारण यह कि हजारों की संख्या में पात्रों को पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है। किसी की पेंशन स्वीकृत नहीं हो सकी है, तो किसी को पेंशन स्वीकृत होने के बाद पूरी किस्त नहीं मिल पा रही है। जीवन के ऐसे दौर में जब एक-एक रुपए का महत्व बढ़ जाता है, तब प्रशासन समय से सभी बुजुर्गों को पेंशन दिला पाने को लेकर अब तक गंभीर नहीं दिख सका है। इसी का नतीजा है कि आए दिन पेंशन के लिए तमाम बुजुर्गों को अपनी ऐड़ियां घिसने के लिए विवश होना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि नई योजना शुरू करने से पूर्व यदि पहले से पंजीकृत पात्रों को समय से पेंशन दिला दी जाए तो यही अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी।
जरूरतमंदों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने के लिए ही विभिन्न प्रकार की पेंशन योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें वृद्धा पेंशन व विधवा पेंशन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। विभागीय आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो जिले में तस्वीर अत्यंत सुहानी नजर आती है। यह बात अलग है कि हकीकत इससे कोसों दूर है। सरकारी रिकार्ड के मुताबित जिले में कुल 76 हजार 924 व्यक्ति वृद्धावस्था पेंशन के लिए पंजीकृत हैं। इन सभी को पेंशन मिल रही है।
विधवा पेंशन का लाभ 17 हजार 252 महिलाओं को दिया जा रहा है। इसके बावजूद दोनों ही प्रकार की पेंशन को लेकर जिले में पात्रों के बीच आपाधापी का माहौल दिखता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी जरूरत मंदों व पात्रों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। जितने भी लोगों का पंजीक रण इन पेंशन के लिए हुआ है, उसके बावजूद हजारों की संख्या में ऐसे वृद्ध शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हैं, जिन्हें पेंशन पाने का इंतजार है। विधवा पेंशन के लिए भी मारामारी है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी वृद्धावस्था पेंशन के लिए ही है। आए दिन तहसीलों से लेकर जिला मुख्यालय तक बुजुर्ग व्यक्ति पेंशन समस्या को लेकर कार्यालयों का चक्कर लगाते देखे जा सकते हैं।
दो दिन पूर्व अमर उजाला ने आलापुर के अमड़ी गांव में जनसमस्याओं को लेकर चौपाल लगाई, तो वहां भी पेंशन की समस्या प्रमुखता से उभर कर सामने आई। विभिन्न तहसील दिवसों में भी ग्रामीण पेंशन की शिकायत लेकर पहुंचते रहते हैं। खास बात यह कि इसके बावजूद सभी पात्रों को पेंशन का लाभ नहीं मुहैया हो पा रहा। ऐसे भी लोगों की कमी नहीं, जिन्हें पेंशन की पूरी किस्त नहीं मिल पाती। बीते दिनों कई बार इसे लेकर बुजुर्ग कार्यालयों का चक्कर काटते दिखे हैं।
शनिवार को विकास भवन में मिले सम्मोपुर निवासी मोतीलाल ने बताया कि उन्हें पूर्व में पेंशन मिल रही थी, लेकिन बीते डेढ़ वर्ष से इसका लाभ नहीं मिल रहा है। लगातार अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। इमामपुर निवासी सीताराम ने बताया कि छह माह से पेंशन नहीं मिल पाई है। इससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कुर्की बाजार निवासी रामनरायन मौर्य ने कहा कि एक वर्ष से उन्हें पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। पांच बार विकास भवन का चक्कर लगा चुुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
उधर मुख्य विकास अधिकारी श्यामसुंदर शर्मा ने कहा कि पात्रों को पेंशन का लाभ दिलाया जा रहा है।
सभी पात्रों को पेंशन मिला सुनिश्चित किया जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि समय समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है।

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