काली सूची के विद्यालय भ्‍ाी बना दिए परीक्ष्‍ाा केंद्र

AmbedkarNagar Updated Wed, 22 Jan 2014 05:46 AM IST
अंबेडकरनगर। दो वर्ष पूर्व हुई यूपी बोर्ड परीक्षा के बाद काली सूची में डाले गए चार विद्यालयों को इस बार की बोर्ड परीक्षा के केंद्रों की सूची में शामिल कर लिया गया है। इसके पीछे आधार भले ही तकनीकी हों, लेकिन सुचिता व परीक्षा की गरिमा के मद्देनजर ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्रों के दायरे से मुक्त रखे जाने जैसा कड़ा निर्णय विभाग व बोर्ड नहीं ले सका। असल में नकल विहीन परीक्षा को लेकर सारे दावे सिर्फ दिखावे ही बनकर रहते आए हैं, जिसके चलते ही इस प्रकार के कड़े फैसलों की उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। उधर कई ऐसे विद्यालयों को भी केंद्र बना दिया गया, जिनमें न तो बाउंड्रीवाल है और न ही फर्नीचर की पर्याप्त व्यवस्था।
यूपी बोर्ड परीक्षा की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। तीन मार्च से परीक्षाएं होनी हैं। परीक्षा को नकल विहीन बनाने के लिए तैयारियों व दावों का दौर भी सामने आने लगा है। यह बात अलग है कि इसे अमलीजामा पहनाने के लिए कोई ठोस प्रयास होता नजर नहीं आ रहा। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011-12 की बोर्ड परीक्षा में विभिन्न आरोपों व गड़बड़ी के चलते जिन चार विद्यालयों क्रमश : माताबदल जायसवाल इंटर कॉलेज, शारदा स्मृति इंटर कॉलेज नेवादा, पदमावती इंटर कॉलेज सुरहुरपुर व स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज जैतपुर को डिबार घोषित किया गया था। उन्हें अब बोर्ड परीक्षा के लिए हरी झंडी दी गई है। विभाग का तर्क है कि इन विद्यालयों को कोर्ट व अन्य अथार्टी ने डिबार की श्रेणी से मुक्त घोषित कर दिया है। इसके बाद यूपी बोर्ड ने भी इन विद्यालयों का नाम डिबार श्रेणी से हटा दिया। इसके बाद ही इन चारों विद्यालयों को यूपी बोर्ड परीक्षा के केंद्र की सूची में शामिल कर लिया गया है। अब शिक्षा विभाग के इसी निर्णय को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
सेवानिवृत्त शिक्षक सूर्यकांत पांडेय ने कहा कि विद्यालयों को काली या प्रतिबंधित सूची से हटा दिया जाना अलग विषय है। यह इतना जरूरी क्या था कि ऐसे विद्यालयों को एक वर्ष बाद फिर से परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिनपर विभिन्न गड़बड़ी सामने आ चुकी है। सेवानिवृत्त शिक्षक रामलाल यादव ने कहा कि जब तक गड़बड़ी वाले विद्यालयों को कम से कम चार या पांच वर्ष के लिए बोर्ड परीक्षा की सूची से हटाया नहीं जाएगा, तब तक नकल विहीन परीक्षा नहीं होगी। अभिभावक राधेश्याम पटेल, जहीरुद्दीन व पंकज गुप्ता ने कहा कि गड़बड़ी से घिरे विद्यालयों को हमेशा के लिए परीक्षा केंद्रों की जिम्मेदारी से हटाया जाए या फिर उन पर भारी जुर्माना तय किया जाए। उधर गड़बड़ी सिर्फ काली सूची वाले केंद्रों तक सीमित नहीं हैं। गत वर्ष जहां 153 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, वहीं इस बार केंद्रों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें लगभग 24 परीक्षा केंद्र ऐसे हैं, जिनमें न तो पर्याप्त फर्नीचर है और न ही चहारदीवारी की संपूर्ण व्यवस्था। इसके बावजूद सिर्फ पहुंच व अन्य माध्यमों के बल पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन अपने विद्यालय को बोर्ड परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल कराने में सफल रहे हैं।

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