बेटियों के मान में सबका सम्मान

AmbedkarNagar Updated Wed, 22 Jan 2014 05:46 AM IST
अंबेडकरनगर। ‘बेटी ही बचाएगी’ नाम से अमर उजाला द्वारा चलाया जा रहा अभियान नित नई बुलंदियों को छू रहा है। यह अभियान अब किसी पहचान का मोहताज नहीं रह गया है। इस अनूठी पहल के प्रति युवाओं में सबसे अधिक रुझान दिखाई दिया। मंगलवार को भी शिक्षक, शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने अभियान को अपना समर्थन दिया। न सिर्फ शपथपत्र को भरते हुए हस्ताक्षर किए, वरन बेटी बचाने एवं उसके सम्मान की रक्षा करने का भी संकल्प लिया। अभियान का शुभारंभ करते हुए सैनिक इंटर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य शशिभूषण शुक्ल ने कहा कि इस प्रकार का अभियान अनूठा है। अमर उजाला ने अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए बेटियों के प्रति लोगों की सोच बदलने के लिए जो कदम आगे बढ़ाया है, वह अत्यंत सराहनीय है। अब इस अभियान को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अकेले अमर उजाला की ही नहीं, वरन हम सभी की है।
शिक्षक चंद्रभान, ज्ञानप्रकाश सिंह व आलोक पाण्डेय ने कहा कि बेटियां हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। बेटियां घरों की रौनक हैं। यदि बेटी न होती, तो कुछ भी न होता। न तो हम होते न आप होते और न ही यह संसार। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि न सिर्फ बेटी बचाने के लिए आगे आएं, वरन ऐसी बेटियां, जो किसी कारणवश अच्छी शिक्षा ग्रहण करने में सक्षम नहीं है, उन्हें आगे लाने में सहायता करें। शिक्षिका सुचिता पाण्डेय, गायत्री त्रिपाठी व शशिभूषण शुक्ल ने कहा कि मौजूदा समय में बेटियां जहां हवाई जहाज उड़ा रही हैं, वहीं ट्रेन चलाने में भी पीछे नहीं हैं। छात्र प्रवीण, अवनीश, गौतम, स्वप्निल व आकाश ने कहा कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने वाली पहली महिला बछेंद्रीपाल ने जता दिया कि ऊबड़ खाबड़ चट्टानें भी बेटियों की सफलता में बाधक नहीं बन सकतीं, तो अरुणिमा सिन्हा ने निशक्त होते हुए भी एवरेस्ट फतह कर बताया कि बेटियों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। छात्र अरुण, नरेंद्र, पंकज, मोहित, अंकुर व सूरज ने कहा कि बेटियों के प्रति लोगों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। छात्र विशाल, पवनेश, अमित, अनिल, रोहित व राहुल ने कहा कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश का प्रतिनिधित्व कर बेटियों को एक नई राह दिखाई, तो पीटी ऊषा, सानिया मिर्जा आदि बेटियों ने खेल की दुनिया में देश का झंडा दुनिया में लहराकर दिखा दिया कि बेटियां अब किसी से पीछे नहीं हैं। छात्र मोहित, विवेक, राजकुमार, प्रभाकर, रामसिंह व योगेश ने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं ने तेजी से सफलता हासिल की है। छात्रा सरला, आकांक्षा, वैशाली, निशु, चांदनी, काजल, हेरा, स्वाति, प्रियंका, रूबी, श्वेता, वंदना, स्वाति व नफीसा ने कहा कि दुनिया में महिलाओं के आगे बढ़ते कदम के बावजूद अभी भी कुछ लोग कन्या भ्रूण हत्या करने से पीछे नहीं रह रहे हैं। न सिर्फ ऐसे लोगों को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा, वरन ऐसे सेंटरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी होगी, जहां भ्रूण की जांच की जाती है।

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