बेटियां समाज व देश की हैं शान

AmbedkarNagar Updated Mon, 20 Jan 2014 05:45 AM IST
अंबेडकरनगर। बेटियां, मां लक्ष्मी की विभिन्न स्वरूप हैं। बेटियां समाज व देश की शान हैं। बेटियां न होतीं, तो न ही हम होते और न ही आप। न तो समाज होता और न ही देश व दुनिया। ‘अमर उजाला’ के बेटी ही बचाएगी अभियान को रविवार को व्यापारियों ने अपना समर्थन देते हुए न सिर्फ अभियान की सराहना की, वरन बेटियों के उत्थान की शपथ भी ली।
अभियान की शुरुआत करते हुए उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष दयाशंकर मद्धेशिया ने शपथ पत्र भरते हुए कहा कि बेटियां देश व समाज की आन, बान व शान हैं। बेटियां समाज व देश का आइना हैं। तमाम बेटियों ने अपने कार्यों से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। इसलिए बेटा-बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव किसी को नहीं करना चाहिए। बेटियां संस्कार को संवारने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। तमाम बेटियां ऐसी हैं, जो अपने दम पर अपने परिवार को चला रही हैं। व्यापार से लेकर राजनीति तक में बेटियों ने डंका बजवाया है। ऐसे में जो लोग बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं, उन्हें इसमें बदलाव लाना होगा। व्यापारी नेता अनिल कुमार अग्रहरि ने ‘अमर उजाला’ के मिशन की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों की समाज को जरूरत है। यह एक ऐसा आइना है, जिसकी सच्चाई हर किसी को महसूस करते हुए अपनी अपनी जिम्मेदारी संभालनी होगी। महेंद्र कुमार व विकास जायसवाल ने कहा कि भारत में बेटियों को मां लक्ष्मी के अवतार का दर्जा दिया गया। ऐसे में जब कोई बेटी शादी होकर अपने ससुराल जाती है, तो उसे विभिन्न प्रकार से क्यों परेशान किया जाता है। यदि बहू और बेटी में अंतर समाप्त कर दिया जाए, तो समाज में बड़ा परिवर्तन आ सकता है। राधेश्याम, रामराज, अरविंद कुमार, धीरज यादव व अमित कुमार एक बेटी कभी बहन बनकर अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती है, तो कभी पत्नी बनकर अपने पति को आगे बढ़ने में बराबर की भागीदारी करती है। मां बनकर अपने बेटे को आंचल में छिपाकर सभी मुश्किलों से बचाती है, तो बहू बनकर परिवारीजनों की सेवा करती है। बेटियों के इतने रूप होने के बाद भी न जाने क्यों कन्या भ्रूण हत्या की जाती है। व्यापारी प्रवीण कुमार, वेदप्रकाश, शुभम विश्वकर्मा, राजकुमार व रवींद्र गुप्ता ने कहा कि अभी तमाम लोग ऐसे हैं, जो शिक्षा की कमी के चलते बेटा-बेटी में भेदभाव रखते हैं। ऐसे लोगों में इस प्रकार का अभियान चलाए जाने की जरूरत है। राजेश कुमार, धनंजय अग्रहरि, कौलेश, संजीव कुमार, आरके त्रिपाठी, शशिभूषण व सूर्यदेव चौहान ने शपथपत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि वे संकल्प लेते हैं कि ऐसी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करें, जो आर्थिक तंगी के चलते अच्छी शिक्षा नहीं ग्रहण कर पाती हैं।

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