सपना ही रह गई टांडा तक सवारी गाड़ी

AmbedkarNagar Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
विद्युतनगर। टांडा रेलवे स्टेशन पर सवारी गाड़ी लोगों के लिए सपना बनकर रह गई है। एक लंबे अर्से से औद्योगिक नगर टांडा से कानपुर के बीच पैसेंजर गाड़ी चलाने की मांग की जा रही है, लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी। अभी हाल ही में रेलवे बोर्ड द्वारा आजमगढ़ से जहांगीरगंज बसखारी होते हुए अंबेडकरनगर तक 92 किलोमीटर नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए जिस सर्वे को मंजूरी दी गई, उसमें टांडा रेलवे स्टेशन को न जोड़ने से यहां के लोगों को करारा झटका लगा है। लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कभी टांडा रेलवे स्टेशन के विकास के लिए प्रभावी ढंग से प्रयास नहीं किया गया, जिससे यह क्षेत्र हमेशा उपेक्षा का शिकार रहा।
सरयू नदी के तट पर स्थित बुनकर नगरी टांडा के औद्योगिक महत्व को देखते हुए अंग्रेजों ने यहां रेल की पटरी बिछाई थी। टांडा व अकबरपुर के मध्य सूरापुर स्टेशन भी स्थापित किया गया। रेलवे द्वारा इस मार्ग पर मालगाड़ी में दो डिब्बे यात्रियों को आने-जाने के लिए जोड़ दिए गए, जो कि सुबह शाम आती जाती थी। बाद में यह सेवा भी बंद हो गई। 70 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने थर्मल पावर की स्थापना कर ताप विद्युत परियोजना की आधारशिला इससे इस रेल खंड का महत्व बढ़ गया। थर्मल को भेजे जाने वाली कोयले की रैक के लिए रेल पटरी का विस्तार विद्युतनगर तक कर दिया गया। कोयले के लिए रैक आने का सिलसिला शुरू हुआ तो बाद में जेपी सीमेंट फैक्ट्री के आने पर इस रेल लाइन का महत्व बढ़ा। वर्तमान में इस रेल लाइन पर मालगाड़ी कोयले व क्लिंकर की रेैक लेकर प्रतिदिन आती है, लेकिन यात्रियों के लिए यह लाइन सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है। विभाग द्वारा टांडा रेलवे स्टेशन की तरफ ध्यान न देने से टांडा से अकबरपुर रेलवे लाइन के इर्द-गिर्द लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। इसके अलावा अभी हाल ही में रेलवे बोर्ड द्वारा आजमगढ़, जहांगीरगंज, बसखारी होते हुए अंबेडकरनगर तक 92 किलोमीटर नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए सर्वे की जो स्वीकृति प्रदान की गई, उसमें रेलवे लाइन को टांडा रेलवे स्टेशन से न जोड़ने से यहां के लोगों को करारा झटका लगा है।

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