बिना स्वीकृति के ही करा डाली 350 बोरिंग

AmbedkarNagar Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबेडकरनगर। न तो शासन से कोई निर्देश मिला और न ही कोई योजना चली। मंत्रियों एवं विधायकों ने कहा, तो जल निगम ने जिले के विभिन्न स्थानों पर 350 से अधिक बोरिंग करा दी। हालांकि इस पर मशीन नहीं लग सकी। इस बीच सरकार बदली, तो ऐसे हैंडपंपों को लेकर शासन व विभाग के उच्चाधिकारी सक्रिय हो गए। अब ऐसे अतिरिक्त हैंडपंपों की सूची व विस्तृत जानकारी शासन ने मांगी है। जिले में जल निगम विभाग के अधिकारी इसे लेकर हलाकान हैं। उधर इससे पहले ही जिले में नए हैंडपंपों के लगाए जाने से लेकर रिबोर किए जाने तक पर रोक लगाई जा चुकी है। इसकी खबर भी सिर्फ ‘अमर उजाला’ ने ही प्रकाशित की थी।
इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगाने में जिल निगम विभाग के अधिकारी व कर्मचारी किस तरह मनमानी करते हैं व उन पर किस तरह राजनैतिक दबाव रहता है, इसका एक बड़ा खुलासा हुआ है। असल में बिना किसी योजना या किसी जनप्रतिनिधि की निधि से मिली स्वीकृत के बगैर ही विभिन्न ब्लॉकाें में 350 से अधिक बोरिंग का कार्य पूर्ववर्ती सरकार में करा दिया गया। इसके पीछे एकमात्र कारण यह था कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए उस समय कई जनप्रतिनिधियों का यह दबाव था कि आचार संहिता के पहले ही अलग-अलग गांव में हैंडपंप लगा दिए जाएं। दबाव को देखते हुए जल निगम अधिकारियों ने कई ब्लॉकों में बोरिंग करवा डाली। हालांकि मशीनें नहीं लग पाई थीं। इसी बीच चुनाव भी आ गया। लोगों को यह उम्मीद हुई कि बोरिंग हो गई है, तो हैंडपंप भी लग ही जाएगा। लोगों का यह भ्रम ज्यादा दिन तक बना नहीं रह सका। कारण यह कि चुनाव बाद सरकार बदल गई और इसके चलते बोरिंग हुए स्थानों पर हैंडपंप लगने का सपना धरा का धरा रह गया। इस बीच गत 21 सितंबर को शासन ने नए हैंडपंपों के लगाए जाने व पुराने हैंडपंपों के रिबोर किए जाने पर रोक लगा दी। अब उन 350 बोरिंग की भी सूचना मांगी गई है, जिनकी कोई स्वीकृति नहीं मिली थी। ऐसी बोरिंग को अतिरिक्त सूची में रखा गया है। शासन ने यह सूची व पूरे तथ्य अविलंब मुहैया कराने को कहा है।

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