मानकों को ताक पर रखकर बना दिए केंद्र

AmbedkarNagar Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
अंबेडकरनगर। यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग की मनमानी व बेफिक्री का आलम इस वर्ष भी सामने आया है। कई ऐसे विद्यालयों को फिर से बोर्ड परीक्षा का केंद्र प्रस्तावित किया गया है, जिनके पास समुचित मानक तक नहीं हैं। जिन विद्यालयों में चहारदीवारी, बेंच व पेयजल तक की पर्याप्त सुविधा नहीं, वे भी बीते वर्षों से बोर्ड परीक्षा का केंद्र बनते चले आ रहे हैं। जाहिर तौर पर ऐसे में नकल रोकने के सभी दावे प्रत्येक वर्ष तार-तार होते हैं और आने वाली बोर्ड परीक्षा में भी इसकी पटकथा लिखी जा चुकी है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान इन अव्यवस्थाओं को लेकर हो-हल्ला मचता भी है, लेकिन इसके बाद शांत हो जाता है। विद्यालयों की तरफ से हालात को मैनेज करने के लिए बाकायदा एक टीम सक्रिय रहती है, जो ऐसी आवाजों को दबाने में कामयाब भी हो जाती है। ले देकर इसका खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है। गत वर्ष सिर्फ ‘अमर उजाला’ ने ही पूरी बेबाकी से नकल माफियाओं व इसे लेकर शिक्षा विभाग के घुटने टेकने के पूरे घटनाक्रम को कई चरण में उजागर किया था। इससे काफी हड़कंप मचा था। नकल पर भी अंकुश लगा, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। इस बार परीक्षा से पहले ‘अमर उजाला’ ने एक बार फिर से अपनी जिम्मेदारी को महसूस करते हुए ऐसे विद्यालयों की दशा सामने लाने का निर्णय लिया, जिन्हें बदहाली के बावजूद बोर्ड परीक्षा का केंद्र बना दिया गया। ऐसे भी विद्यालय इस बार बोर्ड परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल हैं, जिनके पास समुचित फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं हैं। शौचालय की सुविधा भी विद्यालयों में नहीं है। इन सबके बावजूद जुगाड़ तंत्र के जरिए ऐसे तमाम विद्यालय बोर्ड परीक्षा की प्रस्तावित सूची में अपना नाम शामिल कराने में सफल रहे हैं।
रामचेत रामयज्ञ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डोमनेपुर में कुल 350 बच्चे अध्यनरत हैं। प्रबंधक के मुताबिक कुल 14 शिक्षक यहां तैनात हैं। 10 कमरे बने हुए हैं, लेकिन कई की छत नहीं पड़ सकी है। यहां चारों तरफ से बाउंड्रीवाल नहीं है। दो कमरों के बीच आधी दीवार बनाकर छोड़ दी गई है। बोर्ड परीक्षा के दौरान कोई भी व्यक्ति उधर से अनुचित सामाग्री लेकर विद्यालय में पहुंच सकता है। कई कमरों की दशा भी अत्यंत जर्जर है। हालांकि यहां निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन बोर्ड परीक्षा तक सब कुछ चाकचौबंद हो जाने की उम्मीद कम नजर आती है। अलग-अलग कक्षों में मौजूद डेस्क व बेंच बड़ी संख्या में टूटे हुए मिले। यहां बना शौचालय लंबे समय से प्रयोग में आया नहीं दिखा। कारण यह कि शौचालय के इर्दगिर्द का क्षेत्र जंगल में तब्दील हो गया है। बोर्ड परीक्षा के दौरान जरूरत पड़ने पर छात्र-छात्राओं को ऐसे में मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। विद्यालय प्रबंधक रामसूरत ने कहा कि परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राओं के हितों का पूरा ध्यान सुनिश्चित किया जाता है।
पतिराजी देवी बालिका इंटर कॉलेज दुल्लापुर में कहने के लिए तो कुल 21 कमरे हैं, लेकिन अधिकांश की दशा दयनीय है। लगभग 2 हजार छात्र संख्या वाले इस विद्यालय में कुल 21 शिक्षक तैनात हैं। विद्यालय के कमरों की कहीं खिड़की टूटी है, तो कहीं दरवाजे का ही पता नहीं। विद्यालय की चहारदीवारी भी पूरी नहीं है। दो तरफ से परीक्षा के दौरान कोई भी व्यक्ति आसानी से विद्यालय में प्रवेश कर सकता है। विद्यालय के कई कक्ष में छात्राओं के बैठने के लिए प्रयुक्त होने वाला डेस्क व बेंच क्षतिग्रस्त मिला। शौचालय की व्यवस्था सिर्फ फर्ज अदायगी के लिए बनी है। पूरा विद्यालय ही अत्यंत जर्जर व जंगल में तब्दील नजर आता है। साफ-सफाई का तो पुरसाहाल ही नहीं है। ऐसे में यहां बोर्ड परीक्षा के दौरान आने वाले छात्र-छात्राओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। प्रधानाचार्य राजबहादुर यादव कहते हैं कि गत वर्ष परीक्षा का बेहतर ढंग से संचालन किया गया था। इसीलिए इस बार भी केंद्र बनाया गया।
डॉ. राममनोहर लोहिया इंटर कॉलेज सेमरी में कुल 1100 छात्र:छात्राएं अध्यनरत हैं। प्रबंधन का दावा है कि 22 कमरे है, लेकिन इनमें से कई कमरों की छत पक्की नहीं है। छात्र छात्राओं को शिक्षा देने के लिए कुल 18 शिक्षकों की तैनाती है। फर्नीचरों की दशा यहां भी चिंताजनक दिखी। ऐसा कोई कक्ष नहीं मिला, जहां फर्नीचर क्षतिग्रस्त न रही हों। विद्यालय में दो शौचालय की व्यवस्था तो है, लेकिन साफ सफाई बदहाल थी। खिड़कियों में पल्ले नहीं लगे मिले। इस बदहाली के बावजूद विद्यालय को बोर्ड परीक्षा का केंद्र प्रस्तावित किया गया है। गत वर्ष भी यह विद्यालय बोर्ड परीक्षा का केंद्र बना था। इसके बावजूद व्यवस्थाएं दुरुस्त क्यों नहीं हुईं, यह समझ से परे है। जाहिर तौर पर विभागीय अधिकारियों को परीक्षा केंद्र निर्धारण में सुविधाओं से ज्यादा चिंता अन्य तथ्यों की रहती है। प्रधानाचार्य ज्ञानमती वर्मा ने बेहतर सुविधाओं का दावा किया।
रामबदन राममिलन इंटर कॉलेज नसीरपुर में कुल 1250 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं। प्रधानाचार्य रामप्रसाद पांडेय के मुताबिक 24 शिक्षक यहां कार्यरत हैं। पेयजल सुविधा के लिए दो हैंडपंप लगे हैं। कुल 18 शिक्षण कक्ष बने हैं। प्रबंधन के दावों के विपरीत कई कक्षों में खिड़की और दरवाजे नहीं लगे मिले। छात्र संख्या के अनुरूप पर्याप्त फर्नीचर भी नहीं थे। कई कक्षों में कुर्सी मेज टूटी पड़ी हुई थी। विद्यालय में बाउंड्रीवाल चारों तरफ से नहीं बन सकी है। कुल चार ऐसे स्थान हैं, जहां से विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। जाहिर तौर पर बोर्ड परीक्षा के दौरान इसका दुरुपयोग हो सकता है। इस तथ्य की अनदेखी करते हुए भी शिक्षा विभाग ने इस विद्यालय को परीक्षा केंद्र प्रस्तावित कर दिया गया है। साहबदीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर मठिया में साढ़े तीन सौ से अधिक छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं। विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक इस छात्र संख्या के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। विद्यालय का जायजा लेने पर यह विद्यालय बोर्ड परीक्षा केंद्र के मानकों पर खरा उतरता नहीं दिखा। कुर्सी व मेज का यहां अभाव है, तो वहीं पेयजल के लिए सिर्फ एक देसी हैंडपंप लगा हुआ है। पूरे परिसर में सिर्फ एक शौचालय मौजूद है। छात्र-छात्राओं के लिए अलग अलग शौचालय नहीं है। प्रधानाचार्य सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्र संख्या के अनुरूप आवश्यक प्रबंध कर लिए जाएंगे। विद्यालय बोर्ड परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
लगभग 500 छात्र संख्या वाले रामफेर मौर्य बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवादा में भी संसाधनों का अभाव दिखता है। इनके लगभग सभी शिक्षण कक्षों में प्लास्टर तक नहीं हो पाए हैं। सभी कक्ष में कुर्सी व बेंच टूटी हुई पाई गईं। कई कक्ष में दरवाजे नहीं हैं, तो वहीं तमाम खिड़कियों में जंगले का अभाव है। पेयजल के लिए एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है, जबकि एक देसी हैंडपंप बिगड़ा पड़ा हुआ है। अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे इस विद्यालय से बेहतर क्षमता वाले कई अन्य विद्यालय तहसील क्षेत्र में मौजूद हैं, लेकिन उन्हें सेंटर नहीं बनाया गया। प्रधानाचार्य रामदरस के मुताबिक बेहतर ढंग से बोर्ड परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।
बोर्ड परीक्षा हर हाल में बेहतर माहौल में संपन्न कराई जाएगी। विद्यालयों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। संबंधित विद्यालयों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। निर्देशों पर अमल कराने के लिए निरीक्षण भी कराया जाएगा।
-ओमकार सिंह, डीआईओएस

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