गन्ना खरीद में मजदूरों की कमी बाधक, 12 केंद्रों पर शुरू नहीं हुई तौल

AmbedkarNagar Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। धान की बिक्री में मुसीबतों का सामना करने वाले किसानों के लिए अब दोहरा संकट सामने है। गन्ने की बिक्री के लिए यूं तो जिले में 32 केंद्र स्थापित कर दिए गए, लेकिन लगभग एक दर्जन केंद्रों पर अब तक खरीद शुरू नहीं हो पाई है। कहीं पर मजदूरों का संकट है, तो कहीं पर ढुलाई की व्यवस्था न होने से खरीद का कार्य रुका पड़ा है। इसके साथ ही गन्ने का रेट तय न होने से भी किसानों के बीच तरह तरह की आशंकाएं व्याप्त हैं। इसके बावजूद अपना गन्ना लेकर केंद्रों तक पहुंचने पर उन्हें तरह तरह की मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है।
किसानों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा। बीते कुछ समय से जिले का किसान धान की बिक्री को लेकर दर-दर भटक रहा है। शिकायतों के बाद निरीक्षण पर निकलीं डीएम को भी मनमानी दिखी, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई करने की बजाए वे नोटिस या डांट फटकार तक ही सीमित रह गईं। नतीजतन धान क्रय केंद्रों पर मनमानी जस की तस है। इस बीच अकबरपुर चीनी मिल ने गन्ने की खरीद के लिए जिले में 32 केंद्रों की स्थापना करते हुए 28 नवंबर से सभी केंद्रों पर खरीद शुरू हो जाने का दावा किया था। ऐसे में विभिन्न तहसीलों के किसान अपना गन्ना लेकर निर्धारित केंद्रों तक पहुंचने लगे। यह बात अलग है कि लगभग एक दर्जन केंद्रों पर अब तक खरीद ही शुरू नहीं हो पाई है। अकबरपुर तहसील क्षेत्र के रगड़गंज केंद्र पर ‘अमर उजाला टीम’ शनिवार दोपहर करीब पहुंची, तो यहां खरीद नहीं हो रही थी। पांच ट्रैक्टर ट्राॅलियां यहां खड़ी थीं। किसान अशोक मिश्र व राजेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी ट्रैक्टर ट्राॅलियां गुरुवार से यहां खड़ी हैं, लेकिन मजदूरों के अभाव में तौल नहीं हो पा रही है। कहा कि गन्ने की पर्ची मिलने में भी समस्या आ रही है। शिवमूरत व रमाशंकर ने कहा कि क्रय केंद्र पर खरीद शुरू न होने से चीनी मिल प्रशासन के दावे झूठे साबित हुए हैं। किसानों ने यहां बताया कि उन्हें बताया गया है कि यदि सरकार ने रेट घोषित न किया, तो गत वर्ष के रेट पर ही भुगतान किया जाएगा। किसानों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह किसानों के साथ धोखा है। उपज का मूल्य बढ़ाकर घोषित किए जाने की जरूरत है।
नरियांव केंद्र पर लखनडीह के चंद्रभूषण यादव परेशान हाल में मिले। पूछने पर कहा कि भैय्या खरीद की उम्मीद में अपना गन्ना कल से ही लेकर यहां पड़ा हुआ हूं। यहां मजदूर तो हैं, लेकिन सेंटर से अब तक खरीदे गए गन्ने को चीनी मिल तक पहुंचाने के लिए ट्रक की व्यवस्था न होने से खरीद रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि कई अन्य किसान यहां अपना अपना ट्रैक्टर ट्राॅली छोड़कर चले गए हैं। बिड़हर के दयाराम, तिघरा के मदन मिश्र व कटरिया के संतोष दुबे ने कहा कि तौल तो होती रहेगी, लेकिन सरकार को सबसे पहले गन्ना खरीद का मूल्य घोषित करना चाहिए। कर्बला कासिमपुर गन्ना क्रय केंद्र पर मजदूर के अभाव में खरीद का कार्य बाधित था। किसान आद्या प्रसाद, चन्द्रभान, फिरतू आदि ने बताया कि सदस्यता होने के बाद भी अभी तक उनकी पर्चियां उन तक नहीं पहुंच पायी है। गन्ना क्रय केन्द्र शांतिनगर में भी करीब आधा दर्जन गन्ना ट्रालियां खड़ी रही। किसान योगेंद्र प्रसाद, मनोज कुमार, साधूराम ने बताया कि कल से ट्राॅलियां खड़ी हैं। मजदूरों की कमी के चलते गन्ना तौल का कार्य प्रभावित हो रहा है। त्रिभुवन, रामजीत, महेश ने बताया कि गन्ना पर्ची आने की गति काफी धीमी है।

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