धड़ल्ले से हो रहा अवैध नर्सिंगहोम्स का संचालन

AmbedkarNagar Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। स्वास्थ्य मंत्री के गृहक्षेत्र में ही तमाम अवैध नर्सिंगहोम का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। बगैर लाइसेंस के चल रहे इन नर्सिंगहोमों का अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा जिन नर्सिंगहोम के पास लाइसेंस हैं भी, उनमें से कई ऐसे हैं, जहां अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मरीजों को आकर्षित करने के लिए इन नर्सिंगहोमों द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी भरकम लिस्ट लगाई गई है, लेकिन इनमें से शायद ही कोई चिकित्सक इन नर्सिंगहोम में कार्य करते हों। कई बार ऐसे अप्रशिक्षित चिकित्सकों के गलत इलाज का शिकार मरीजों को होना पड़ता है। इसकी शिकायत भी होती है, लेकिन कार्रवाई करने की सुध प्रशासन को नहीं है। कई अस्पताल तो ऐसे हैं, जहां सरकारी चिकित्सक ही धड़ल्ले से प्रैक्टिस कर रहे हैं।
कम समय में अधिक धन कमाने के लिए लोगों का ध्यान नर्सिंगहोम चलाने की तरफ मौजूदा समय में तेजी से बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र अकबरपुर नगर में ही 20 से अधिक नर्सिंगहोम का संचालन किया जा रहा है। यह अलग बात है कि इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जिनके पास लाइसेंस नहीं है। सिर्फ इतना ही नहीं इनमें से भी कई नर्सिंगहोम में अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इन चिकित्सकों के पास न तो किसी प्रकार की डिग्री है और न ही कोई डिप्लोमा। इन चिकित्सकों के झांसे में फंसकर आए दिन मरीजों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। इसकी शिकायत भी लगातार की जाती है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस प्रकार के नर्सिंगहोम संचालकों एवं अप्रशिक्षित चिकित्सकों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई करने के लिए कोई सार्थक कदम नहीं उठा रहा है। नतीजतन अवैध नर्सिंगहोम का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। यदि अकबरपुर नगर की बात की जाए, तो स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यहां मात्र 13 नर्सिंगहोम ऐसे हैं, जिनके पास लाइसेंस हैं। इनमें अन्नू नर्सिंगहोम, ग्लोब हॉस्पिटल, मेंहदी हॉस्पिटल, यश पॉलीक्लीनिक, राज हॉस्पिटल, अमन हॉस्पिटल, आरके मेमोरियल, न्यू सिटी हॉस्पिटल, स्टार हॉस्पिटल, साधना हॉस्पिटल, सुभि नर्सिंगहोम, हसन हॉस्पिटल व इंदू हॉस्पिटल शामिल हैं। यह सभी अस्पताल स्थानीय लोगों द्वारा ही संचालित किए जा रहे हैं। गैर प्रदेशों का कोई भी व्यक्ति इनमें शामिल नहीं है।
इन लाइसेंसधारी हॉस्पिटलों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने मरीजों को आकर्षित करने के लिए चिकित्सालय के बाहर बोर्ड पर तमाम विशेषज्ञ चिकित्सकों के नाम लिखा रखे हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं परे है। चिकित्सालय में इन विशेषज्ञों के स्थान पर अप्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा जिले के अन्य क्षेत्रों में लाइसेंसधारी नर्सिंगहोम की संख्या कम लेकिन अवैध रूप से संचालित नर्सिंगहोम की संख्या कहीं अधिक है। नर्सिंगहोमों व अस्पतालों के नाम पर मनमानी यहीं तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय पर 6 से अधिक ऐसे चिकित्सालय हैं, जहां सरकारी चिकित्सक बगैर अपने नाम पते का उल्लेख किए हुए प्रतिदिन मरीजों का इलाज करता नजर आता है। उसकी दिलचस्पी अपनी तैनाती वाले सरकारी चिकित्सालय में कम, इन नर्सिंगहोमों व निजी चिकित्सालयों की तरफ अधिक होती है।
बीते दिनों सभी पंजीकृत चिकित्सालयों व नर्सिंगहोमों को कड़े निर्देश जारी किए गए थे। समय-समय पर जायजा भी लिया जाता है। निकट भविष्य में जांच अभियान चलाया जाएगा। - डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ

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