मनरेगा मजदूरों को नहीं मिला पर्याप्त काम

AmbedkarNagar Updated Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। मनरेगा का लाभ पात्रों तक पहुंचाने के प्रति विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। उनकी लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 31 अक्तूबर तक 22 लाख 38 हजार के सापेक्ष मात्र 9 लाख 63 हजार मानव दिवस ही सृजित किए जा सके है। जिले के 2 लाख 14 हजार 60 जॉबकार्ड धारकों के सापेक्ष महज 50 हजार 421 को ही योजना के तहत काम मिल सका। उसमें भी मात्र 65 लोगों को ही 100 दिन का काम मिला। जिले में सुस्त रफ्तारी से चल रहीं 2,268 परियोजनाओं पर मात्र 14 करोड़ 94 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके हैं, जबकि 47 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च किए जाने का लक्ष्य था।
गरीबों को अपने गांव में ही रोजगार दिलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही मनरेगा योजना के तहत न तो पात्रों को 100 दिन का काम मिल पा रहा है और न ही उन्हें समय से भुगतान ही। भुगतान के लिए एक तरफ जहां पात्रों को संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है, तो वहीं कार्य के लिए उन्हें ग्राम प्रधान से लेकर अन्य अधिकारियों की जी हुजूरी करनी पड़ रही है। इसके बाद भी योजना जनपद में पूरी तरह बेपटरी होकर रह गई है। योजना का सुचारु लाभ दिलाने के लिए संबंधित अधिकारी तनिक भी गंभीर नहीं हो रहे हैं। इसके लिए मनरेगा मजदूरों द्वारा तहसील दिवसों पर भी आवाज बुलंद की जाती है, लेकिन उनकी आवाज दबकर रह जाती है।
योजना का लाभ जिले के 2 लाख 14 हजार 60 जॉबकार्ड धारकों को दिलाने के लिए अधिकारी कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 31 अक्तूबर तक मात्र 50 हजार 421 मनरेगा मजदूरों को ही रोजगार मिल सका है। इसमें से मात्र 65 मजदूरों को ही 100 दिन का रोजगार मिला हैं। जिले में चल रहीं 2268 परियोजनाओं पर 31 अक्तूबर तक 47 करोड़ 44 लाख रुपये खर्च होने थे, लेकिन मात्र 31 प्रतिशत अर्थात 14 करोड़ 94 लाख रुपये ही खर्च किया जा सका है। यही नहीं 31 अक्तूबर तक 22 लाख 38 हजार में से सिर्फ 9 लाख 63 हजार मानव दिवस ही सृजत किए गए।

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