29 दिन बाद भी धान क्रय केंद्रों पर पसरा है सन्नाटा

AmbedkarNagar Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। धान की खरीद शुरू हुए 29 दिन बीत चुके है, लेकिन अभी तक किसी भी केंद्र पर धान खरीद का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। लगभग सभी केंद्रों पर कांटा बाट तो मौजूद है, लेकिन उस पर तौल होने का इंतजार है। क्षेत्र में अभी हाइब्रिड धान तो तैयार हैं, लेकिन इसकी खरीदारी नहीं की जा रही है। हाईब्रिड धान की खरीद न होने से किसानों में व्यापक नाराजगी व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार के धान की खरीद नहीं करनी थी, तो इसकी फसल के लिए किसानों को प्रेरित क्यों किया गया।
धान की बिक्री के लिए किसानों को इधर-उधर न भटकना पड़े, इसके लिए शासन ने एक अक्तूबर से विभिन्न केंद्रों पर धान खरीद का कार्य प्रारंभ किए जाने की घोषणा की। हालांकि शुरुआती दौर में तमाम क्रय केंद्रों के ताले ही नहीं खुले। जहां के ताले खुले भी, वहां कांटा बाट नहीं पहुंच सका। कुछ दिनों के बाद लगभग सभी केंद्रों पर कांटा बाट पहुंचने के साथ साथ बैनर भी टांग दिए गए। अब इंतजार था, तो बस किसानों का। शासन ने जिले में पांच एजेंसियों के अंतर्गत विपणन के आठ केंद्रों को 40 हजार मीट्रिक टन, पीसीएफ के 17 केंद्रों को 25 हजार, यूपी एग्रो के 1 केंद्र को 4300, यूपीएसएस के 2 केंद्र को 3 हजार व राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के 3 केंद्रों को 300 मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया।
अक्तूबर माह लगभग समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक इन केंद्रों पर धान खरीद का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। केंद्रों पर कांटा बाट सहित कर्मचारी भी मौजूद हैं, लेकिन खरीद का कार्य ठप पड़ा है। दरअसल अभी सिर्फ हाइब्रिड धान ही तैयार हैं। यह धान लेकर जो किसान केंद्रों पर पहुंचे, लेकिन उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि हाइब्रिड धान की खरीद पर रोक लगी हुई है। ऐसे में किसान केंद्रों की तरफ फिलहाल अपना रुख इक्कादुक्का ही कर रहे हैं। कटरिया सम्मनपुर के किसान गोपाल वर्मा व किशुनपट्टी के अरविंद कुमार ने बताया कि हाइब्रिड धान तैयार होने के बाद वे उसे लेकर यूपी एग्रो केंद्र शहजादपुर लेकर गए, लेकिन वहां से यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि हाइब्रिड धान की खरीद पर शासन ने रोक लगा रखा है। कहा कि जिस सामान्य धान की खरीद होनी है, वह अभी तक तैयार नहीं है। सिकरोहर के जफरयाब व अकबरपुर के रामविलास ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि हाइब्रिड धान की खरीद नहीं करनी थी, तो फिर इसकी फसल के लिए किसानों को अधिक प्रेरित क्यों किया गया। उन्होंने जिला प्रशासन से हाइब्रिड धान की खरीद किए जाने की मांग की।

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