शिक्षक के विद्यालय आने पर रोक

AmbedkarNagar Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त एक प्रधानाचार्य का जिले में अपमान किया जा रहा है। प्रबंध समिति ने उनको विद्यालय आने से रोक दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देश पर पहले प्रबंधक ने उन्हें कार्यभार ग्रहण कराया, लेकिन अब आदेश की वैधता के सत्यापन के नाम पर उन्हें विद्यालय आने से मना कर दिया गया है। पहले उन पर 9 दिन का प्रतिबंध लगाया गया और फिर जब वे विद्यालय पहुंचे, तो बैरंग वापस करते हुए 13 दिन बाद 31 को आकर वस्तुस्थिति की जानकारी करने को कहा गया है।
प्रबंधकीय विद्यालयों में होने वाली मनमानी का खामियाजा इस बार उस शिक्षक को भुगतना पड़ा है, जिसे शिक्षा का सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। टांडा तहसील क्षेत्र के बनहवा बाबा लघु माध्यमिक विद्यालय एकडल्ला के प्रधानाचार्य आद्या प्रसाद दुबे को गत 5 सितंबर 2012 को राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2011 के लिए मिला। हालांकि पुरस्कार प्राप्त करने से पहले ही वे 30 जून 2012 को सेवानिवृत्त हो गए। बकौल दुबे उन्होंने रिटायर होने से पहले ही लिखित तौर पर प्रबंधन को यह जानकारी दे दी थी कि उनका नाम राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए गया है। इस पर सेवानिवृत्त होने से पहले ही प्रबंधन ने लिखित तौर पर यह भरोसा दिलाया था कि नाम चयनित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दुबे के रिटायर होने के बाद विद्यालय कार्यवाहक प्रधानाचार्य के भरोसे रहा। पुरस्कार प्राप्त कर आद्या प्रसाद वापस अंबेडकरनगर लौटे, तो 18 सितंबर को बीएसए दलसिंगार यादव ने शिक्षा निदेशक बेसिक के सेवा विस्तारण संबंधी दिनांक 22 जनवरी 86 के निर्देशों के अनुरूप उन्हें 1 जुलाई 2012 से 30 जून 2014 तक के लिए दो वर्ष का सेवा विस्तार उसी पद व वेतनमान पर कर दिया। शिक्षा निदेशक व अन्य अधिकारियों को सूचना देने के साथ ही उन्होंने प्रबंधक को भी पत्र लिखकर कार्यभार ग्रहण कराने को कहा।
बीएसए के पत्र के आधार पर दुबे को 19 सिंतबर को प्रबंधक ने बतौर प्रधानाचार्य विद्यालय में जॉइन करा दिया। इसी बीच 22 सितंबर को प्रबंधन की एक आपात बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि सेवानिवृत्त होने के बाद सेवा विस्तार की वैधता की जानकारी कराई जाएगी। आद्या प्रसाद हालांकि अपने पद पर कार्य करते रहे। इसी बीच उन्हें 6 अक्तूबर को प्रबंधन की तरफ से लिखित तौर पर कहा गया कि एक अधिवक्ता को मामले की जांच के लिए शिक्षा निदेशक व शिक्षा सचिव के पास भेजा जाएगा। ऐसे में वे 7 से 15 अक्तूबर तक विद्यालय न आएं। दुबे के मुताबिक 16 अक्तूबर के अवकाश के बाद जब वे 17 को विद्यालय पहुंचे, तो अध्यक्ष रघुपति त्रिपाठी ने उन्हें लिखित तौर पर बताया कि 16 अक्तूबर को प्रबंध समिति की एक बैठक हुई है, जिसकी कार्रवाई से आप सूचित हों। कार्रवाई की प्रति उसमें संलग्न की गई थी, जिसमें तय किया गया था कि अब प्रबंध समिति सदस्य विश्वनाथ सिंह मामले की जांच के लिए स्वयं लखनऊ जाएंगे। ऐसे में 31 अक्तूबर तक प्रधानाचार्य को विद्यालय में आने से रोका जाता है। इस नोटिस के बाद से आद्या प्रसाद दुबे ने विद्यालय जाना बंद कर दिया है।

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