खून के लिए जिला अस्पताल में 12 दिनों से तड़प रही प्रसूता

AmbedkarNagar Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। प्रसूताओं के लिए नि:शुल्क खून देने का शासन का आदेश से जिला अस्पताल के सीएमएस ही वाकिफ नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जनपद वाले चिकित्सालय में ही एक गरीब प्रसूता 12 दिन से खून के लिए तड़प रही है, लेकिन उसे खून नहीं मिल रहा है। प्रसव में ऑपरेशन के दौरान उसके पति ने एक बार अपना खून डोनेट कर उसके लिए ‘ बी-पॉजेटिव’ ग्रुप के खून की व्यवस्था की थी। अब दोबारा जरूरत आ पड़ी है, तो संकट खड़ा हो गया है। कारण यह कि अब दोबारा उसका खून लिया नहीं जा सकता और दूसरे उसके पास इतना पैसा नहीं कि वह खून का प्रबंध कर सके। गरीबों की मदद का दम भरने वाले जनप्रतिनिधियों से लेकर समाजसेवी संस्थाओं तक ने भी अभी तक उनकी कोई सुध नहीं ली है। नतीजतन दंपती ने अब सिर्फ भगवान का आसरा कर लिया है। कहते हैं कि भगवान को जो मंजूर होगा, वह तो होकर ही रहेगा।
पूरा मामला जुड़ा है जिला अस्पताल के वार्ड नंबर एक में भर्ती मरीज संगीता राजभर से। जलालपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत संजलपुर सिकंदरपुर निवासी अंगद राजभर की पत्नी संगीता को प्रसव पीड़ा के बाद 6 अक्तूबर को जिला चिकित्सालय में लाया गया था। यहां ऑपरेशन के बाद उसे पुत्री पैदा हुई, जो कोख में ही मर चुकी थी। महिला चिकित्सक डॉ. जयश्री गुप्त ने ऑपरेशन के दौरान खून की जरूरत को देखते हुए उसके पति से आवश्यक प्रबंध करने को कहा था।
पति ने महामाया मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर पहुंचकर अपना खून दिया और अपनी पत्नी के लिए बी-पॉजिटिव ग्रुप का खून प्राप्त किया। इसके बाद ऑपरेशन तो सफलतापूर्वक हो गया, लेकिन महिला की हालत गंभीर बनी रही। चिकित्सक डॉ. गुप्ता ने मरीज की हालत देखकर पर्चे पर पुन: खून चढ़ाने की आवश्यकता का उल्लेख किया। उन्होंने पति को मौखिक तौर पर बताया भी कि संगीता को खून चढ़ाने की जरूरत है। वह और खून का प्रबंध करे। पुत्री को खोने के बाद अपनी पत्नी को बचाने के लिए अंगद फिर से मेडिकल कॉलेज पहुंचा। उसने वहां फिर से अपना खून देने के लिए कहा, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उसे मना कर दिया गया। अंगद व उसका परिवार बीपीएल श्रेणी का है। इस बीच कई नात रिश्तेदार संगीता को देखने तो आए, लेकिन खून देने का साहस नहीं जुटा सके। अंगद ने कई परिचितों और रिश्तेदारों से अनुनय विनय भी किया, लेकिन कोई पसीजा नहीं। अंगद ने इसके बाद जिला चिकित्सालय के कर्मचारियों से कहा कि उसके शरीर का खून फिर से निकलवा दिया जाए। वह अपनी पत्नी को बचाने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। हालांकि यहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद से अंगद और उसकी पत्नी संगीता हालात से समझौता करने को विवश हो गए हैं। डॉ. जयश्री गुप्ता ने स्वीकार किया कि मरीज को खून की कमी है। उसके पति को रक्त की ओर व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। हालांकि आयरन की गोलियों एवं अन्य दवाओं के माध्यम से सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।

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