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कम दाम में भव्य मूर्ति बनाने की चुनौती से जूझ रहे कारीगर

AmbedkarNagar Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। बढ़ती महंगाई में भी कम दाम पर भव्य मूर्ति बनाने की चुनौती से दुर्गा प्रतिमाओं के कारीगरों को जूझना पड़ रहा है। महंगाई के चलते प्रतिमाओं में लगने वाले सभी सामानों के दाम में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि गत वर्ष के सापेक्ष हो गई है, लेकिन प्रतिमाओं का आर्डर देने वाले लोग इस सच को स्वीकार करने के लिए आमतौर पर तैयार नहीं हैं। दुर्गा पूजा समितियों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए इन परिस्थितियों में कारीगर अपना पूरा जोर लगाए हुए हैं। कम खर्च में भी आकर्षक मूर्तियों को बनाने के अभियान में कारीगरों को जुटे हुए दिन रात देखा जा सकता है।
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16 अक्तूबर से प्रारंभ होने वाले दुर्गा पूजा पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर है। मां दुर्गा की भव्य मूर्तियों को अंतिम रूप में देने में कारीगरों का हाथ तेजी से चल रहे है। हालांकि मूर्तियों पर पेंट का ब्रुश चलाने के साथ उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें भी उत्पन्न हो रही हैं। कारण यह कि इस बार महंगाई की मार सीधे तौर पर मूर्तियों के निर्माण पर पड़ रही है। बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को उनके बजट के अनुसार मां दुर्गा की मूर्ति दे पाना कड़ी चुनौती बनी हुई है। जिले में हालांकि दुर्गा पूजा पंडालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन समितियों के पदाधिकारियों द्वारा कम रेट में भव्य प्रतिमाओं की मांग ने कारीगरों के सामने समस्या खड़ी कर दी है।

मूर्तियों के निर्माण में अधिक लागत आने एवं समितियों द्वारा कम रेट में भव्य मूर्तियों की मांग से कारीगरों की चिंता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस बार छोटी मूर्तियां अधिक बनाई हैं। पहितीपुर रोड पर मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण कर रहे कोलकाता से आए कारीगर समलपाल ने बताया कि वह विगत 25 वर्ष से अपने परिवार के साथ यही कार्य कर रहा है। बताया कि सीजन में लगभग 50 हजार रुपये की कमाई हो जाती है। हालांकि इस बार कमाई को लेकर उनके सामने चिंता बनी हुई है। लोगों द्वारा कम दाम पर भव्य मूर्ति की मांग की जा रही है। ऐसे में उनकी मांग पर खरा उतरना मुश्किल हो गया है। हालांकि जब लोग अपने आर्डर की मूर्तियां लेने आते हैं और तारीफ करते हैं, तो मूर्ति बनाने में आने वाली सभी मुश्किल व थकान दूर होती नजर आती है। यह एक ऐसी कमाई होती है, जिसका कोई मूल्य नहीं होता। उनके यहां डेढ़ हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक की मूर्ति है। महंगी मूर्तियों का निर्माण आर्डर पर किया जाता है। अब तक एक बड़ी मूर्ति व 13 छोटी मूर्ति का आर्डर अब तक मिल चुका है। अकबरपुर फैजाबाद मार्ग पर मूर्तियों का निर्माण कर रहे कारीगर सुब्रतपाल ने बताया कि इस बार धंधा कुछ ढीला है। सीजन में 50 से 60 मूर्तियां बिक जाती थीं, इस बार अभी तक तो मांग कम है। कहा कि उनके पास 1 हजार से 11 हजार रुपये की मूर्तियां हैं। पैसे से ज्यादा चिंता इस बात की रहती है कि मूर्ति लेने आए लोगों की राय मूर्ति के बारे में कैसी रहती है? तारीफ सुनने के बाद और भव्य मूर्तियां बनाने की प्रेरणा मिलती है।

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