‘आशा बहुओं पर समाज को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी’

AmbedkarNagar Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। समाज को स्वस्थ रखने की सबसे अधिक जिम्मेदारी आशा बहुओं पर है। आशा बहुओं को अपनी जिम्मेदारी गंभीरतापूर्वक समझना होगा। जननी सुरक्षा योजना का लाभ पात्रों तक अधिक से अधिक पहुंचाने के लिए उन्हें हरसंभव कदम उठाना होगा। यह बातें रविवार को अकबरपुर नगर स्थित रमाबाई महिला डिग्री कॉलेज में आयोजित जिलास्तरीय आशा बहू सम्मेलन को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंखलाल मांझी ने कही। उन्होंने आशा बहुओं से आह्वान कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं, इसलिए उन पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक है। श्री मांझी ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना के तहत आशाओं की जिम्मेदारी है कि वह गर्भवती महिलाओं प्रसूत के लिए अस्पतालों में ले जाएं। साथ ही उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिलाएं। अभी भी जानकारी के अभाव में तमाम महिलाओं को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए आप सभी को आगे आना होगा। बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का अस्पतालों में प्रसव कराने पर 1400 व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये देने की योजना है। इस योजना का लाभ उन्हें अवश्य दिलाना होगा। उन्हें सुरक्षित प्रसव के लिए जागरूक करना होगा। जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता पैदा नहीं होगी, तब शिशुओं के मृत्यु दर पर अंकुश लगाना संभव नहीं है। इससे पूर्व जिलाधिकारी डॉ. जोवल ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन के लिए भी लोगों में जागरूकता पैदा करनी होगी। छोटा परिवार ही समाज में खुशियां ला सकता है। सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने आशा बहुओं को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं व अन्य को उनसे काफी उम्मीदें हैं। इसलिए समय-समय पर टीकाकरण कराने के प्रति उनमें जागरूकता पैदा करनी होगी। बताया कि आशा योजना के अंतर्गत जननी सुरक्षा योजना के लिए आशाओं को 600 रुपये, नसबंदी कार्यक्रम में प्रेरक शुल्क एवं केस फॉलोअप के लिए 200 रुपये, क्षय नियंत्रण कार्यक्रम में क्षय रोगियों का पूर्ण इलाज कराने के लिए 250, कुष्ठ रोग का पूर्ण इलाज के लिए 300 व 500, पल्स पोलियो अभियान बूथ एवं घर-घर कार्य के लिए प्रतिदिन 75, नियमित टीकाकरण अभियान के लिए 150 रुपये, किसी भी गर्भवती को गर्भावस्था में उत्पन्न जटिलता अथवा नवजात शिशु की किसी जटिलता की स्थिति में चिकित्सालय तक पहंचाने के लिए प्रति केस 200 रुपये सहित अन्य कई योजनाओं के लिए उन्हें भुगतान किया जाता है। इस दौरान एडीएम रामाश्रय, सीडीओ भरतलाल राय, सीएमएस डॉ. एसपी सिंह, डीपीआरओ उपेंद्रराज, डॉ. इम्तियाज अंसारी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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