वादों को पूरा न करने से किसानों में जबर्दस्त आक्रोश

AmbedkarNagar Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
विद्युतनगर। एनटीपीसी विस्तारीकरण को लेकर किसानों के कड़े रुख ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शनिवार को हुए हंगामे व तोड़फोड़ के बाद अब इतना तो तय है कि किसानों को आश्वस्त किए बगैर विस्तारीकरण की राह आसान नजर नहीं आती। प्रशासन अब बैकफुट पर दिखाई पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन एनटीपीसी के साथ मिलकर उनकी भूमि को कौड़ियों के भाव खरीदना चाहता है। जब तक संबंधित भूमि को अति विशिष्ट व्यवसायिक श्रेणी मानकर मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
एनटीपीसी की 1320 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित होनी हैं। यहां 440 मेगावाट यूनिट की इकाइयां पहले से ही कार्यरत हैं। विस्तारीकरण को लेकर कुल नौ गांवों के ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। एनटीपीसी ने किसानों के लिए कई प्रकार की रियायतों व सुविधाओं की घोषणा भी की है, लेकिन अधिकांश किसानों पर इसका असर नहीं पड़ रहा है। बीते दिनों कुछ किसानों से करार कराया भी गया, लेकिन इसमें प्रशासन को ज्यादा सफलता नहीं मिली। प्रशासन की ओर से लगातार बढ़ाए जा रहे दबाव को देखते हुए ही किसानों ने 22 सितंबर को आंदोलन की घोषणा कर रखी थी। आंदोलन करने पहुंचे किसानों ने जमकर हंगामा व तोड़फोड़ की। किसानों के इस रुख ने प्रशासन की सभी तैयारियों को करारा झटका दिया है। किसानों ने यह जता दिया है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में आकर चुप बैठने वाले नहीं हैं।
किसानों का कहना है कि प्रशासन व शासन लगातार उनके साथ छल कर रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसानों में से एक नरेंद्रदेव त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों को तीन बार पहले भी उजाड़ा जा चुका है। तब नौकरी से लेकर अन्य जो वायदे किए गए थे, वह पूरी तरह पूरे नहीं किए गए। इसके साथ ही इस बार भी प्रशासन धोखा कर रहा है। कहा कि एनटीपीसी के आसपास की भूमि अतिविशिष्ट व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज है। इसके अनुरूप मुआवजा न देना पड़े, इसलिए प्रशासन ने नोटिस जारी करते समय भूमि की श्रेणी ही बदल दी। त्रिपाठी ने बताया कि इसी से किसानों में जबरदस्त आक्रोश है। किसान अब धोखे में नहीं आने चाहते हैं। इसीलिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। किसान मनीराम वर्मा ने कहा कि एनटीपीसी व जिला प्रशासन के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है, जिसके चलते जिला प्रशासन किसानों पर अनावश्यक दबाव बना रहा है।
किसानों के इस रुख से अब एनटीपीसी विस्तारीकरण की राह आसान नजर नहीं आती। जाहिर तौर पर प्रशासन को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। यह सवाल एडीएम रामाश्रय से किया गया तो उन्होंने कहा कि किसानों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं हो रही। जहां तक भूमि की श्रेणी बदलने की बात है, तो इसके लिए विधिवत कमेटी का गठन कर निर्णय लिया गया है।

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