अब प्रीमियम पेट्रोल से जेब पर 55 हजार रुपये का बोझ

AmbedkarNagar Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। प्रीमियम पेट्रोल के दाम में हुए वृद्धि से अब जिले में प्रतिदिन 55 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं को वहन करना पड़ेगा। इसे लेकर उपभोक्ताओं ने कड़ी नाराजगी प्रकट की है। उपभोक्ताओं का एक वर्ग ऐसा है, जो प्रीमियम पेट्रोल का ही प्रयोग करता है। इसके साथ ही सामान्य पेट्रोल समाप्त होने पर कई बार उपभोक्ताओं को इसी पेट्रोल का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में टैक्स समेत प्रति लीटर लगभग सात रुपये की वृद्धि ने उपभोक्ताओं के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है।
महंगाई पर महंगाई से उपभोक्ताओं का पिंड छूटने का नाम नहीं ले रहा है। उपभोक्ता अभी वर्ष में सिर्फ 6 रसोई गैस सिलेंडर ही सब्सिडी पर मिलने व डीजल मूल्य वृद्धि की घोषणा से उबर नहीं पाए थे कि सरकार ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम में धीरे से बढ़ोत्तरी कर दी। इस निर्णय ने भी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूं तो जिले में सामान्य पेट्रोल की ही बिक्री है, लेकिन कई बार लोगों को प्रीमियम पेट्रोल भरवाने की भी परिस्थिति बन जाती है। उपभोक्ताओं का एक वर्ग है, जो यही पेट्रोल अपने वाहन में डलवाता है। जनपद में कुल 40 पेट्रोलपंप स्थित हैं। इनमें सादे पेट्रोल की खपत 85 हजार लीटर प्रतिदिन है, जबकि प्रीमियम पेट्रोल की खपत 8 हजार के आसपास है। कारण यह कि प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री जिले के सिर्फ आठ पेट्रोल पंपों पर ही होती है। जिले में अब तक प्रीमियम पेट्रोल 76 रुपये 60 पैसे में बिकता रहा है, जो सरकार की बढ़ोत्तरी व टैक्स के बाद अब 83 रुपये 50 पैसे में बिकना शुरू हुआ है। जाहिर तौर पर ऐसे में अब प्रतिदिन उपभोक्ताओं को प्रीमियम पेट्रोल के लिए 55 हजार से अधिक की रकम ढीली करनी होगी।
सरकार के इस निर्णय का जिले में व्यापक विरोध हुआ है। चिकित्सक डॉ. मुकुल त्रिपाठी ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल सादे पेट्रोल से बेहतर होता है। वे तो इसी का प्रयोग करते हैं, लेकिन सात रुपये की वृद्धि ने पेट्रोल भरवाने के बारे में ही सोचने को विवश कर दिया है। डॉ. अशोक स्मारक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य आरके सिंह ने कहा कि सरकार लोगों का दीवाला निकालने पर तुली हुई है। समझ में नहीं आ रहा कि वह आखिर इतने अनापशनाप फैसले क्यों ले रही है। व्यवसायी प्रदीप पांडेय ने कहा कि जरूरी दिशा में कदम उठाने की बजाए सरकार का यह निर्णय अत्यंत गैर जिम्मेदाराना है।
सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में फिजूलखर्ची रोककर जनता पर बोझ डालने से बचना चाहिए। कम्प्यूटर संस्थान संचालक रवींद्र श्रीवास्तव ने निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। वहीं स्वामी रामानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक राजेंद्र तिवारी ने कहा कि ऐसे फैसलों से यह जाहिर होता है कि सरकारों को आम आदमी के दुखदर्द की परवाह नहीं। व्यवसायी विमलेंद्र प्रताप सिंह ने जोर देकर कहा कि अच्छा तो यह होता कि सांसदों, विधायकों व मंत्रियों पर रुपये लुटाने की बजाए आम लोगों को सब्सिडी दी जाती।

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