शिक्षामित्रोें के हवाले 37 विद्यालय

AmbedkarNagar Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
अंबेडकरनगर। प्राथमिक शिक्षा को लेकर विभागीय मनमानी का एक नजारा देखिए। जिले के 37 प्राथमिक विद्यालयों में न तो प्रधानाध्यापक तैनात हैं और न ही कोई सहायक अध्यापक। यहां सिर्फ शिक्षामित्रों के भरोसे शिक्षा दी जा रही है। इससे भी बड़ा सच यह है कि जिले के तीन प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर शिक्षामित्रों की भी तैनाती नहीं है।
गांव-गांव बच्चों को शिक्षा देने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती अभी भी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 37 प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक नहीं हैं। अकबरपुर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय अहलादे में तीन पद, चकियवा में दो पद, हरखपुर कौड़हा में दो पद, जोरियाना में दो पद, सिकंदरपुर में तीन पद, ताराकला में तीन पद व विश्रामपुर में तीन पद के सापेक्ष एक भी शिक्षक नहीं हैं। भीटी विकास खंड के परियाएं में दो पद व जहांगीरगंज विकास खंड के थरियाखुर्द में दो पद के सापेक्ष एक भी शिक्षक की तैनाती नहीं की जा सकी है। जलालपुर विकास खंड के बैरागल में तीन पद, खजुरी करौंदी में दो, खानपुर उमरन में तीन, मथुरापुर में दो व सकरायूसुफपुर में तीन पद, कटेहरी विकास खण्ड के नंदूपुर भरथुआ में दो व प्रतापीपुर में दो पद के सापेक्ष कोई शिक्षक नहीं है।
रामनगर विकास खण्ड के दुर्गूपुर में तीन, हथिनाराज में दो, परसौली व रामबाग में तीन तीन पद, टांडा विकास खंड के बलयाजगदीशपुर में तीन, भड़सारी में तीन, बिहरोजपुर में दो, दौलतपुर भगाही में तीन, गौहनिया में दो, हकीमपुर में दो, खैरा में दो, महुवारी प्रथम में पांच, नंदपुर में दो, पियारेपुर में दो, सैनी का पूरा में दो, सालारपुर में तीन व चौक टांडा में तीन पद के सापेक्ष कोई शिक्षक तैनात नहीं किया जा सका है।
इन सभी 34 विद्यालयों में कहीं एक तो कहीं दो शिक्षामित्र तैनात हैं। इनमें सात विद्यालय ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षामित्र तैनात है। नतीजा यह होता है कि उसके बीमार होने या अन्य कार्य से बाहर जाने पर विद्यालय बंद हो जाता है। इससे छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है। भीटी विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय थरिया खुर्द में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां कोई शिक्षक नहीं हैं। रामनगर विकास खंड के ख्वाजापुर में प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत नहीं है। दो सहायक अध्यापक पद के सापेक्ष किसी की भी तैनाती नहीं है। टांडा विकास खंड के हकीम जोत में भी प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत नहीं किया गया है। दो अध्यापक पद के सापेक्ष यहां भी तैनाती नहीं है। सबसे खास बात यह कि यह तीन विद्यालय ऐसे हैं, जहां किसी शिक्षामित्र की भी तैनाती नहीं है। नतीजा यह है कि यह विद्यालय अक्सर बंद ही रहता है। हालांकि विभाग का दावा है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पढ़ाई कराई जाती है, लेकिन यह संभव नजर नहीं आता।

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